Mark Zuckerberg Apology : सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म मेटा (Meta) की मुश्किलें भारत में लगातार बढ़ती जा रही हैं। चाइल्ड सेक्सुअल अब्यूज मटेरियल के प्रमोटेड विज्ञापनों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो गलती से हटाने के मामले में चौतरफा घिरी कंपनी ने अपनी गलतियां मान ली हैं।
सूत्रों के मुताबिक, मेटा ने इन गलतियों, Deep Fale कंटेंट और प्लेटफॉर्म ऑपरेशन में हुई गड़बड़ियों को लेकर भारत सरकार से आधिकारिक रूप से माफी मांगी है। केंद्र सरकार ने कंपनी को सख्त लहजे में साफ कर दिया है कि अगर वे कंटेंट की रीच और ऑडियंस खुद तय करते हैं, तो उन्हें ‘इंटरमीडियरी’ नहीं माना जा सकता। ऐसे में आईटी एक्ट के तहत मिलने वाली लीगल प्रोटेक्शन यानी ‘सेफ हार्बर’ उन पर लागू नहीं होगी।
संसदीय समिति की सख्त चेतावनी
आईटी और कम्यूनिकेशन मामलों की पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन और बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने इस पूरे विवाद पर बेहद सख्त रुख अपनाया है। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जुलाई में जारी हुए वीडियो को Facebook से चार-पांच घंटे के लिए हटाना कोई साधारण तकनीकी खराबी नहीं है।
उन्होंने मेटा प्रमुख मार्क जुकरबर्ग से तीन दिन के भीतर बिना शर्त माफी मांगने की मांग की थी। दुबे का कहना है कि अगर जुकरबर्ग माफी नहीं मांगते हैं, तो सेक्शन 79 के तहत सोशल मीडिया कंपनियों को मिलने वाली सेफ हार्बर सुरक्षा वापस ले ली जानी चाहिए।
CSAM विज्ञापनों पर NHRC और NCPCR का कड़ा रुख
सिर्फ पीएम मोदी के वीडियो का मुद्दा ही नहीं, बल्कि बच्चों से जुड़े अश्लील कंटेंट (CSEAM) का बिजनेस प्रमोशन भी मेटा के लिए बड़ा गले का फंदा बन गया है।
मीडिया रिपोर्ट्स का स्वतः संज्ञान लेते हुए नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
दूसरी तरफ, नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन ने भी दिल्ली पुलिस को इस पूरे नेक्सस की जांच करने के निर्देश दिए हैं। जांच में यह देखा जा रहा है कि क्या मेटा और इंस्टाग्राम ने पॉक्सो एक्ट के तहत तय नियमों का पालन किया था या नहीं।
MeitY सचिव से मिला उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल
बढ़ते विवाद के बीच मेटा के चीफ ग्लोबल अफेयर्स ऑफिसर जोएल कापलान के नेतृत्व में एक हाई-लेवल डेलिगेशन ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय (MeitY) के सचिव एस कृष्णन से मुलाकात की।
करीब 45 मिनट चली इस मीटिंग में मेटा अधिकारियों ने अपनी सफाई दी। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि सरकार इन जवाबों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है और मेटा के अधिकारियों को जवाबदेही तय करने के लिए दोबारा समन किया जा सकता है।
