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पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती मामले में ईडी ने दूसरी चार्जशीट दाखिल की

पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती मामले में ईडी ने दूसरी चार्जशीट दाखिल की

Punjabkesari.com 2 weeks ago

कोलकाता, 3 जुलाई (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को बताया कि जांच एजेंसी के कोलकाता क्षेत्रीय कार्यालय ने करोड़ों रुपए के स्कूल में नौकरी दिलाने के नाम पर हुए घोटाले में बड़ी कार्रवाई की है।

ईडी ने इस संबंध में पश्चिम बंगाल के पूर्व शिक्षा मंत्री और तृणमूल कांग्रेस के महासचिव पार्थ चटर्जी, उनकी करीबी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी और अन्य के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की विशेष अदालत में 25 जून को दूसरी पूरक चार्जशीट दाखिल की है।

ईडी द्वारा जारी एक बयान में कहा गया कि यह शिकायत धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत 18 अप्रैल, 2024 की चार्जशीट और 18 अक्टूबर, 2025 की पहली पूरक चार्जशीट के क्रम में दाखिल की गई है। ईडी ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर इस मामले में जांच शुरू की थी।

केंद्रीय जांच एजेंसी के अनुसार, अनुसूचित अपराध भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), 1860 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के प्रावधानों के तहत आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार से संबंधित हैं।

पीएमएलए के तहत की गई जांच में पता चला है कि ओएमआर स्कोर में हेराफेरी, व्यक्तित्व परीक्षा के अंकों में हेरफेर, अयोग्य उम्मीदवारों की अवैध नियुक्ति और पैनल की समय सीमा समाप्त होने के बाद भी नियुक्तियां जारी करके बड़े पैमाने पर भर्ती घोटाला किया गया था।

ईडी द्वारा जारी बयान में कहा गया कि जांच में यह भी सामने आया है कि हजारों उम्मीदवारों को निर्धारित नियमों का उल्लंघन करते हुए शिक्षण पदों पर अवैध रूप से नियुक्त किया गया या नियुक्ति के लिए अनुशंसित किया गया, जिससे योग्य उम्मीदवारों को उनकी वैध नियुक्तियों से वंचित किया गया।

ईडी के अनुसार, जांच में यह भी पता चला है कि पार्थ चटर्जी ने पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (डब्ल्यूबीएसएससी), स्कूल सेवा आयोग, पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड और विभिन्न बिचौलियों के अधिकारियों के साथ मिलीभगत करके अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग करते हुए अवैध भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित करने और सुविधाजनक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

ईडी के बयान में कहा गया कि जांच में यह भी पता चला कि अयोग्य उम्मीदवारों से नियुक्ति और सिफारिश के बदले अवैध रिश्वत ली गई थी। आपराधिक गतिविधियों से प्राप्त धन को कई व्यक्तियों और संस्थाओं के माध्यम से भेजा गया और उसे बेदाग संपत्ति के रूप में दिखाया गया।

इस मामले में अब तक कुल तीन अंतरिम कुर्की आदेश जारी किए गए हैं, जिनकी राशि 301.58 करोड़ रुपए है।

–आईएएनएस

एमएस/

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