वेटिकन सिटी, 4 जुलाई (आईएएनएस)। पोप लियो XIV ने अमेरिकी परंपरा की प्रशंसा करते हुए वर्तमान राष्ट्रपति की नीतियों पर निशाना साधा है। अपने गृह देश अमेरिका को संबोधित पहले प्रमुख संदेश में अप्रवासियों का स्वागत करने की अमेरिकी परंपरा की सराहना की और नागरिकों से संयुक्त राज्य अमेरिका की स्वतंत्रता की घोषणा में निहित आदर्शों पर कायम रहने का आह्वान किया।
पोप के आधिकारिक एक्स अकाउंट पर उनका बयान जारी किया गया। वेटिकन मीडिया ने बताया कि फिलाडेल्फिया स्थित नेशनल कॉन्स्टिट्यूशन सेंटर ने उन्हें लिबर्टी मेडल से सम्मानित किया। इस दौरान वेटिकन से वर्चुअली समारोह में शामिल पोप ने कहा कि दुनिया भर में "अमेरिका" स्वतंत्रता का पर्याय इसलिए बना क्योंकि उसने प्रवासियों का स्वागत किया।
उन्होंने कहा कि अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ देश के संस्थापक सिद्धांतों एकता, न्याय और शांति पर पुनर्विचार करने का अवसर है।
पोप ने कहा, "यह ऐतिहासिक वर्षगांठ हमें राष्ट्र के स्थापना सिद्धांतों पर फिर से विचार करने का अवसर देती है, ताकि अमेरिका उस सपने के प्रति सदैव सच्चा बना रहे जिसने उसे 'स्वतंत्र लोगों की भूमि' और 'साहसी लोगों का घर' का गौरव दिलाया।"
अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के अवसर पर पोप लियो ने शनिवार को दक्षिणी इटली के द्वीप लाम्पेदूसा का भी दौरा किया, जो उत्तरी अफ्रीका से समुद्री मार्ग से यूरोप पहुंचने वाले प्रवासियों का प्रमुख प्रवेश द्वार माना जाता है।
वहां उन्होंने हाल ही में पहुंचे प्रवासियों, इतालवी तटरक्षक बल के अधिकारियों और राहत संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की और कहा कि पोप उनके साथ खड़ा है तथा उनका समर्थन और उत्साहवर्धन करता रहेगा।
उन्होंने यूरोपीय नेताओं से अपील की कि वे प्रवासन के मुद्दे का दीर्घकालिक और व्यापक समाधान खोजें, जिसमें प्रवासियों का स्वागत, सुरक्षा, सहायता और समाज में समावेशन शामिल हो। साथ ही उन्होंने प्रवासियों के मूल देशों की परिस्थितियों में सुधार लाने की भी आवश्यकता बताई, ताकि लोगों को मजबूर होकर अपना देश न छोड़ना पड़े।
पोप लियो पहले भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आव्रजन नीतियों के विरोध में अपनी राय रख चुके हैं। पिछले वर्ष नवंबर में उन्होंने अमेरिका से हिरासत केंद्रों में रखे गए लोगों के साथ किए जा रहे व्यवहार पर "गहन आत्ममंथन" करने का आह्वान किया था। इसके बाद अमेरिका-इजरायल के ईरान पर किए संयुक्त सैन्य अभियान की भी पोप ने कड़ी आलोचना की, जिसके बाद ट्रंप प्रशासन और वेटिकन के संबंधों में और तनाव आ गया था।
लाम्पेदूसा यात्रा से कुछ दिन पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा था कि आव्रजन पर वेटिकन के विचार "चिंताजनक" हैं।
पोप लियो ने अभी तक व्हाइट हाउस आने के ट्रंप के निमंत्रण को स्वीकार नहीं किया है। यह निमंत्रण पिछले वर्ष मई में उनके पोप पद ग्रहण समारोह के अगले दिन वेटिकन में हुई मुलाकात के दौरान जेडी वेंस ने दिया था।
वर्ष 2026 की विदेश यात्राओं की सूची में अमेरिका शामिल नहीं है, हालांकि ट्रंप प्रशासन के कुछ अधिकारियों को उम्मीद थी कि पोप 4 जुलाई के स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल हो सकते हैं।
करीब 6,000 आबादी वाला लाम्पेदूसा द्वीप दशकों से उत्तरी अफ्रीका से भूमध्य सागर पार कर आने वाले प्रवासियों का पहला प्रमुख पड़ाव रहा है। इतालवी रेड क्रॉस के आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में 1.82 लाख से अधिक प्रवासी इस द्वीप के स्वागत केंद्र से होकर गुजरे हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (आईओएम) के अनुसार, 2014 से ट्यूनीशिया और लीबिया से भूमध्य सागर पार करने की कोशिश में हजारों लोगों की मौत हो चुकी है। केवल इस वर्ष जनवरी से अप्रैल की शुरुआत तक ही लगभग 1,000 लोग भूमध्य सागर में मृत या लापता दर्ज किए गए।
लाम्पेदूसा में पोप लियो ने प्रवासियों, उनकी सहायता में जुटे मानवीय कार्यकर्ताओं और समुद्री यात्रा से बचकर निकले लोगों के साथ प्रार्थना सभा (मास) में हिस्सा लिया।
–आईएएनए
केआर/
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