Dailyhunt Logo
  • Light mode
    Follow system
    Dark mode
    • Play Story
    • App Story
संविधान समानता पर जोर देता है, लेकिन इसकी वास्तविक स्थिति का आकलन जरूरी: जी. परमेश्वर

संविधान समानता पर जोर देता है, लेकिन इसकी वास्तविक स्थिति का आकलन जरूरी: जी. परमेश्वर

Punjabkesari.com 1 week ago

तुमकुरु, 4 जुलाई (आईएएनएस)। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने शनिवार को कहा कि संविधान की प्रस्तावना समानता पर जोर देती है, लेकिन इस बात का गंभीरता से आकलन करने की जरूरत है कि समाज और कानूनी व्यवस्था में समानता किस हद तक हासिल की गई है।

वे तुमकुरु के शेट्टिहल्ली में एक लॉ कॉलेज में ग्रेजुएशन समारोह को संबोधित कर रहे थे।

आजादी के बाद से भारत की प्रगति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि देश की साक्षरता दर आजादी के समय लगभग 12 प्रतिशत से बढ़कर आज लगभग 80 प्रतिशत हो गई है। उन्होंने लॉ ग्रेजुएट से आग्रह किया कि वे अपने पेशे को सिर्फ एक करियर के तौर पर न देखें, बल्कि कानून के शासन को बनाए रखने और न्याय दिलाने की जिम्मेदारी के तौर पर देखें।

संविधान के महत्व पर जोर देते हुए परमेश्वर ने कहा कि डॉ. बीआर अंबेडकर ने भारत को एक मजबूत संवैधानिक ढांचा दिया है, जो देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव है।

उन्होंने कहा, “अगर संविधान कमजोर होता है तो लोकतंत्र भी कमजोर हो जाएगा। संविधान में निहित मूल्यों की रक्षा करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।”

उन्होंने आगे कहा कि संविधान का अनुच्छेद 51ए नागरिकों के मौलिक कर्तव्यों को रेखांकित करता है, जबकि अनुच्छेद 12 से 35 मौलिक अधिकारों से संबंधित हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र तभी प्रभावी ढंग से काम कर सकता है जब नागरिक अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों दोनों को स्पष्ट रूप से समझें।

उन्होंने कहा कि एक प्रभावी वकील बनने के लिए कानून की गहरी समझ जरूरी है और लॉ ग्रेजुएट से आग्रह किया कि वे कानूनी पेशे में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए लगातार सीखते रहें।

ग्रेजुएट हो रहे छात्रों को उत्कृष्टता के लिए प्रयास करने के लिए प्रोत्साहित करते हुए उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में मुकदमेबाज लगातार केवल कुछ ही वकीलों को चुनते हैं, क्योंकि उन्होंने अपने गहरे कानूनी ज्ञान और प्रभावशाली वकालत के जरिए जनता का भरोसा जीता है।

उन्होंने कहा कि युवा वकीलों को लगातार अध्ययन और समर्पण के जरिए उसी स्तर की विशेषज्ञता हासिल करने की कोशिश करनी चाहिए।

उपमुख्यमंत्री ने बताया कि भारत में 1,500 से ज्यादा लॉ कॉलेज हैं जो हर साल हजारों ग्रेजुएट तैयार करते हैं। इसके बावजूद, अदालतों में बड़ी संख्या में मामले लंबित रहते हैं जो मामलों के शीघ्र निपटारे को सुनिश्चित करने के लिए और अधिक न्यायिक सुधारों की आवश्यकता को उजागर करता है।

परमेश्वर ने यह भी कहा कि भारत वैश्विक कानूनी क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ा रहा है और भारतीय कानूनी विशेषज्ञ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि साइबर अपराध एक बड़ी चुनौती के रूप में उभरा है और साइबर अपराधों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए कानूनों को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

–आईएएनएस

डीएमके/वीसी

(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)

Dailyhunt
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: PunjabKesari.com