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अमरनाथ यात्रा का यह वीडियो देख आंखों में आंसू आ जाएंगे.

अमरनाथ यात्रा का यह वीडियो देख आंखों में आंसू आ जाएंगे.

Quick Joins 1 week ago

मरनाथ यात्रा को सनातन धर्म में न सिर्फ सबसे पवित्र बल्कि सबसे कठिन तीर्थयात्राओं में से एक माना जाता है। हर साल लाखों श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए कश्मीर के दुर्गम रास्तों पर अपनी शारीरिक और मानसिक सहनशक्ति की परीक्षा देते हैं।

लेकिन साल 2026 की इस यात्रा में एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने साक्षात चमत्कार शब्द को चरितार्थ कर दिया है। इन दिनों सोशल मीडिया के हर प्लेटफॉर्म पर नेहा भट्ट नाम की एक महिला का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में दिख रहा दृश्य किसी के भी रोंगटे खड़े करने के लिए काफी है। नेहा के दोनों पैर कृत्रिम (नकली) हैं, एक हाथ में लकड़ी की छड़ी है और दूसरी बांह पर बैसाखी का सहारा है। इस बेहद चुनौतीपूर्ण स्थिति के बावजूद, उनके चेहरे पर एक ऐसी अलौकिक मुस्कान है, जिसे देखकर पहाड़ों की ऊंचाइयों का गुरूर भी टूटता हुआ नजर आ रहा है। वे बेहद सावधानी और धीरज के साथ एक-एक कदम आगे बढ़ा रही हैं।

बालताल का वो रास्ता जहाँ अच्छे-अच्छों के छूट जाते हैं पसीने

अमरनाथ गुफा तक पहुँचने के लिए दो मुख्य रास्ते हैं, जिनमें से एक पहलगाम का पारंपरिक मार्ग है और दूसरा बालताल का रास्ता है। नेहा भट्ट ने अपनी इस यात्रा के लिए जानबूझकर बालताल मार्ग को चुना। आपको बता दें कि बालताल का रास्ता पहलगाम की तुलना में छोटा जरूर है, लेकिन इसकी चढ़ाई इतनी सीधी और खड़ी है कि यहाँ अच्छे-भले और पूरी तरह स्वस्थ लोगों के भी पसीने छूट जाते हैं। पथरीले, उबड़-खाबड़ और संकरे रास्तों पर जहाँ जरा सी चूक सीधे गहरी खाई में धकेल सकती है, वहाँ नकली पैरों के संतुलन के साथ आगे बढ़ना किसी अजूबे से कम नहीं है। भारी-भरकम जैकेट पहने नेहा ने विपरीत मौसम और ऑक्सीजन की कमी जैसी जानलेवा परिस्थितियों के सामने कभी भी अपने हौसले को डगमगाने नहीं दिया। इस पूरी यात्रा में उनके ठीक पीछे साए की तरह एक युवक खड़ा रहा, जो हर मुश्किल मोड़ पर उनका संबल बना। नेहा ने खुद सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर इस बात का खुलासा किया कि वह युवक उनका छोटा भाई है, जिसने इस सफर को मुमकिन बनाने में अपनी जान लगा दी।

तारीफों के सैलाब के बीच उठा 'दिखावे' का बड़ा सवाल

जैसे ही नेहा भट्ट के इस अदम्य साहस का वीडियो इंटरनेट पर आया, यह आग की तरह फैल गया। देखते ही देखते इस वीडियो को लाखों व्यूज और हजारों शेयर्स मिल चुके हैं। वीडियो के वायरल होते ही कमेंट सेक्शन इंटरनेट यूजर्स के विचारों का अखाड़ा बन गया है। जहाँ एक तरफ देश के कोने-कोने से लोग नेहा के जज्बे को सलाम कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ समाज का एक हिस्सा इस पर गंभीर सवाल भी उठा रहा है। एक बड़े वर्ग का मानना है कि नेहा की यह भक्ति इस बात का सबूत है कि अगर मन में सच्ची श्रद्धा हो, तो ईश्वर खुद आकर आपका रास्ता आसान कर देता है। लोग उन्हें 'कलयुग की असली भक्त' बता रहे हैं और उनके आत्मविश्वास की जमकर तारीफ कर रहे हैं। यूज़र्स का कहना है कि यह वीडियो उन लोगों के लिए एक करारा तमाचा है जो छोटी-मोटी परेशानियों से घबराकर जिंदगी में हार मान लेते हैं।

डिजिटल दौर में आस्था बनाम सोशल मीडिया रील्स की बहस

इस पूरी कहानी का दूसरा पहलू बेहद चौंकाने वाला है, जिसने इंटरनेट पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है। तारीफों के बीच कई यूजर्स ऐसे भी हैं जो इस पूरे घटनाक्रम को 'कैमरा प्रैंक' या 'पब्लिसिटी स्टंट' का नाम दे रहे हैं। आलोचना करने वाले एक यूजर ने लिखा कि यदि मन में इतनी ही सच्ची आस्था थी, तो इसे बिना कैमरे के भी पूरा किया जा सकता था। लोगों का आरोप है कि आजकल तीर्थस्थलों को रील्स बनाने और सोशल मीडिया पर 'वाह-वाही' बटोरने का जरिया बना दिया गया है, जिससे कहीं न कहीं अध्यात्म का मूल तत्व नष्ट हो रहा है। आलोचकों के अनुसार, इस तरह के संवेदनशील और खतरनाक रास्तों पर कैमरे के साथ चलना खुद की और दूसरों की जान को जोखिम में डालना है। हालांकि, इस तीखी बहस के बीच भी बहुसंख्यक लोग नेहा के समर्थन में खड़े हैं। उनका तर्क है कि कारण चाहे जो भी हो, लेकिन दोनों नकली पैरों से अमरनाथ की खड़ी चढ़ाई को पार कर लेना कोई साधारण बात नहीं है और इसके लिए सिर्फ कैमरे की नहीं, बल्कि फौलादी जिगर की जरूरत होती है।

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