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प्रीति जिंटा की तस्वीरों से कौन कर रहा था छेड़छाड़?

प्रीति जिंटा की तस्वीरों से कौन कर रहा था छेड़छाड़?

Quick Joins 2 weeks ago

बॉलीवुड अभिनेत्री प्रीति जिंटा ने अपनी तस्वीरों और वीडियो के कथित गलत इस्तेमाल को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उनका कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से उनकी तस्वीरों और वीडियो में बदलाव कर सोशल मीडिया और इंटरनेट पर फैलाया जा रहा है।

इससे उनकी छवि और निजी अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। इस मामले को गंभीर मानते हुए अदालत ने सुनवाई के दौरान संबंधित पक्षों को कंटेंट हटाने की प्रक्रिया को लेकर जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। यह मामला AI डीपफेक से जुड़े बढ़ते खतरे को भी सामने लाता है।

सोशल मीडिया और वेबसाइटों पर लगाए गंभीर आरोप

प्रीति जिंटा ने अपनी याचिका में कहा है कि इंस्टाग्राम, फेसबुक, यूट्यूब और कुछ अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उनके नाम, चेहरे और पहचान का गलत तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है। उनका आरोप है कि AI तकनीक के जरिए तैयार की गई फर्जी तस्वीरें और वीडियो लोगों तक पहुंचाए जा रहे हैं। इसके अलावा कुछ वेबसाइटें भी उनके नाम का उपयोग कर लोगों को भ्रमित कर रही हैं, जबकि उनका उन प्लेटफॉर्म से कोई संबंध नहीं है। अभिनेत्री का कहना है कि इस तरह की गतिविधियां उनके व्यक्तित्व, निजता और कानूनी अधिकारों का उल्लंघन करती हैं।

कोर्ट में क्या हुई सुनवाई?

सुनवाई के दौरान प्रीति जिंटा की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि आज के समय में डीपफेक कंटेंट की पहचान करना आसान नहीं है। इसलिए ऐसे मामलों में सोशल मीडिया कंपनियों और अन्य प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी तय होना जरूरी है। दूसरी ओर, गूगल, मेटा और अन्य पक्षों की ओर से अदालत को बताया गया कि यदि आपत्तिजनक कंटेंट के सही लिंक उपलब्ध कराए जाते हैं, तो नियमों के तहत उन लिंक को हटाने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। साथ ही यह भी कहा गया कि ऐसा कोई आदेश न दिया जाए, जिससे वैध और कानूनी कंटेंट प्रभावित हो।

AI के दौर में बढ़ रही नई चुनौती

AI तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डीपफेक और मॉर्फ्ड कंटेंट के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। कई कलाकार और सार्वजनिक हस्तियां पहले भी इस तरह की शिकायतें उठा चुकी हैं। प्रीति जिंटा का यह कदम उन लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो अपनी डिजिटल पहचान के गलत इस्तेमाल को लेकर चिंतित हैं। अब सभी की नजर बॉम्बे हाई कोर्ट की अगली सुनवाई पर रहेगी, क्योंकि इस मामले में आने वाला फैसला भविष्य में AI से जुड़े ऐसे मामलों के लिए एक अहम उदाहरण बन सकता है।

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