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TMC प्रदेश अध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य ने छोड़ दिए सभी पद?

TMC प्रदेश अध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य ने छोड़ दिए सभी पद?

Quick Joins 2 weeks ago

श्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रदेश अध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना इस्तीफा सीधे पार्टी प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भेजा।

चंद्रिमा भट्टाचार्य लंबे समय से ममता बनर्जी की भरोसेमंद नेताओं में गिनी जाती रही हैं। ऐसे में उनका अचानक सभी जिम्मेदारियों से अलग होने का फैसला राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, उन्होंने अपने इस्तीफे में किसी भी कारण का उल्लेख नहीं किया है, जिससे इस फैसले को लेकर कई तरह के सवाल उठने लगे हैं।

प्रदेश अध्यक्ष के साथ सभी जिम्मेदारियां भी छोड़ीं

अपने इस्तीफे में चंद्रिमा भट्टाचार्य ने बताया कि वह राज्य अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे रही हैं। इसके साथ ही उन्होंने पार्टी में संभाल रही दूसरी सभी संगठनात्मक जिम्मेदारियों से भी खुद को अलग करने की घोषणा की। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अब वह पार्टी और उससे जुड़े संगठनों के बैंक खातों की अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता (ऑथराइज्ड सिग्नेटरी) नहीं रहेंगी। यानी पार्टी की वित्तीय और प्रशासनिक जिम्मेदारियों से भी उन्होंने खुद को पूरी तरह अलग कर लिया है। उनके इस कदम को टीएमसी के लिए एक अहम घटनाक्रम माना जा रहा है।

चुनाव आयोग में भी नहीं करेंगी पार्टी का प्रतिनिधित्व

चंद्रिमा भट्टाचार्य ने अपने पत्र में यह भी कहा है कि अब वह भारत निर्वाचन आयोग के सामने ममता बनर्जी की अधिकृत प्रतिनिधि के रूप में भी काम नहीं करेंगी। उन्होंने इस जिम्मेदारी से अपनी सहमति वापस लेने की जानकारी भी दी है। इससे साफ है कि उन्होंने केवल एक पद नहीं छोड़ा, बल्कि पार्टी से जुड़ी कई अहम भूमिकाओं से एक साथ दूरी बना ली है। हालांकि, उन्होंने कहीं भी यह नहीं बताया कि उन्होंने यह फैसला किन कारणों से लिया। इसी वजह से उनके इस्तीफे को लेकर राजनीतिक चर्चाएं और अटकलें तेज हो गई हैं।

अब सबकी नजर टीएमसी की अगली रणनीति पर

चंद्रिमा भट्टाचार्य के इस्तीफे के बाद अब सभी की नजर तृणमूल कांग्रेस की अगली रणनीति पर है। फिलहाल पार्टी की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जब तक इस्तीफे की असली वजह सामने नहीं आती, तब तक इस मुद्दे पर चर्चाएं जारी रहेंगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि पार्टी इस खाली हुए पद पर किसे जिम्मेदारी सौंपती है और इस घटनाक्रम का पश्चिम बंगाल की राजनीति पर आगे क्या असर पड़ता है। फिलहाल चंद्रिमा भट्टाचार्य का यह फैसला राज्य की सबसे बड़ी राजनीतिक खबरों में शामिल हो गया है।

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