देश में महंगाई का दबाव एक बार फिर आम जेब पर साफ दिख रहा है।
एक मई से कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में सीधी ₹993 की बढ़ोतरी कर दी गई है। इस फैसले ने खासतौर पर छोटे कारोबारियों, रेस्टोरेंट संचालकों और ठेले-खोमचे वालों की लागत बढ़ा दी है। वहीं, राजनीतिक गलियारों में भी इसको लेकर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
कीमतों में उछाल, कारोबार पर सीधा असर
सरकार के इस फैसले के बाद अब दिल्ली में 19 किलो वाला कमर्शियल सिलेंडर ₹3,071.50 का हो गया है। इसके अलावा 5 किलो वाले छोटे सिलेंडर की कीमत में भी ₹261 का इजाफा हुआ है। ऐसे में खाने-पीने के छोटे बिजनेस चलाने वालों के लिए खर्च बढ़ना तय माना जा रहा है।
सीधे शब्दों में कहें तो सिलेंडर महंगा होने का असर सिर्फ गैस तक सीमित नहीं रहता, यह खाने की थाली तक पहुंचता है।
'7 रुपये कम करके एहसान?'-अखिलेश का तंज
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस बढ़ोतरी पर सरकार को घेरा है। उनका कहना है कि अगर कीमत बढ़ानी ही थी तो सीधे ₹1000 बढ़ा देते, ₹7 कम करके जनता पर एहसान जताने की कोशिश क्यों?
उन्होंने यह भी कहा कि असली महंगाई का असर वही समझता है जो खुद बाजार से खरीदकर खाता है। उनके बयान में साफ तौर पर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाया गया है, खासकर तब जब बेरोजगारी और मंदी जैसे मुद्दे भी चर्चा में हैं।
कांग्रेस का आरोप-'वसूली जारी है'
कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर सरकार को निशाने पर लिया है। पार्टी ने आंकड़ों के साथ दावा किया कि पिछले चार महीनों में कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है।
जनवरी से मई के बीच कुल मिलाकर ₹1,518 तक की बढ़त बताई गई है। कांग्रेस का कहना है कि यह सिर्फ शुरुआत है और साल के बाकी महीनों में और दबाव बढ़ सकता है।
पार्टी ने तंज कसते हुए कहा कि सरकार की नीति आम लोगों से 'वसूली' करने जैसी बनती जा रही है।
आम आदमी पर क्या पड़ेगा असर
कमर्शियल सिलेंडर की कीमत बढ़ने का सीधा असर होटल, ढाबा और फूड सर्विस सेक्टर पर पड़ता है। ऐसे में खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने की संभावना भी बढ़ जाती है।
छोटे व्यापारियों के लिए यह बढ़ोतरी मार्जिन कम कर सकती है, जबकि ग्राहकों के लिए महंगी थाली की स्थिति बन सकती है।यह फैसला सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी की लागत से जुड़ा हुआ है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि आगे कीमतों में राहत मिलती है या यह दबाव जारी रहता है।

