राजधानी की राजनीति में हलचल उस वक्त तेज हो गई जब Raghav Chadha ने सोशल मीडिया पर एक रहस्यमयी पोस्ट साझा किया।
इस पोस्ट में वह अमेरिकी लेखक Robert Greene की किताब The 48 Laws of Power पढ़ते नजर आए। पोस्ट का कैप्शन और उसमें लिखा "Never outshine the master" वाला संदर्भ अब राजनीतिक संकेतों के तौर पर देखा जा रहा है। खासकर ऐसे समय में, जब उनका अपनी ही पार्टी Aam Aadmi Party से मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं।
राज्यसभा से हटाए जाने के बाद बढ़ी दूरी
हाल ही में आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में डिप्टी लीडर के पद से हटा दिया था। इतना ही नहीं, पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय से यह भी कहा कि उन्हें पार्टी की ओर से बोलने का समय न दिया जाए। यह कदम अपने आप में बड़ा संकेत माना जा रहा है, क्योंकि चड्ढा पार्टी के सबसे प्रमुख और युवा चेहरों में गिने जाते रहे हैं। इसके बाद से उनके बयानों और सोशल मीडिया गतिविधियों पर खास नजर रखी जा रही है।
पोस्ट का मतलब क्या? 'Never outshine the master' पर चर्चा
चड्ढा ने अपने पोस्ट में लिखा कि "कुछ किताबें सही समय पर आती हैं।" उन्होंने खास तौर पर पहले अध्याय का जिक्र किया, जिसमें 'Never outshine the master' यानी "गुरु से आगे न निकलें" की बात कही गई है। राजनीतिक गलियारों में इसे सीधे तौर पर पार्टी नेतृत्व, खासकर Arvind Kejriwal के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि चड्ढा ने इस पर कोई सीधा बयान नहीं दिया है, लेकिन पोस्ट ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
पार्टी नेताओं के आरोप, 'लाइन से भटकने' की बात
AAP के कई वरिष्ठ नेताओं-जैसे Bhagwant Mann, Sanjay Singh और Saurabh Bharadwaj-ने चड्ढा पर पार्टी लाइन से अलग चलने के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि चड्ढा कई अहम मुद्दों पर पार्टी के साथ खड़े नहीं दिखे। जैसे चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग पर साइन न करना या संसद में विरोध प्रदर्शन से दूरी बनाए रखना। इन आरोपों ने पार्टी के भीतर असहमति को और उजागर कर दिया है।
पहले भी उठे थे सवाल, अब खुलकर दिख रहा तनाव
यह पहली बार नहीं है जब AAP के अंदर इस तरह का विवाद सामने आया है। इससे पहले भी Swati Maliwal के साथ जुड़े विवादों ने पार्टी की अंदरूनी स्थिति पर सवाल खड़े किए थे। राघव चड्ढा के मामले में भी उनके कुछ फैसलों और चुप्पी-खासकर जब अरविंद केजरीवाल जेल में थे-ने पहले ही चर्चाओं को जन्म दिया था।
आगे क्या? संकेतों से बढ़ी सियासी दिलचस्पी
फिलहाल, राघव चड्ढा की यह पोस्ट एक "संकेत" के रूप में देखी जा रही है, न कि सीधे बयान के तौर पर। लेकिन चुनावी और राजनीतिक माहौल में ऐसे संकेत भी बड़ा असर डालते हैं। अब नजर इस बात पर है कि क्या यह विवाद और बढ़ेगा या पार्टी नेतृत्व और चड्ढा के बीच सुलह का रास्ता निकलेगा।

