Dailyhunt
केरल में कांग्रेस की दमदार वापसी: 10 साल बाद सत्ता, 7 साल बाद 4 CM का रिकॉर्ड फिर कायम

केरल में कांग्रेस की दमदार वापसी: 10 साल बाद सत्ता, 7 साल बाद 4 CM का रिकॉर्ड फिर कायम

*pointer-events-auto [content-visibility:auto] supports-[content-visibility:autocontain-intrinsic-size:auto_100lvh] R6Vx5W_threadScrollVars scroll-mb-[calc(var(--scroll-root-safe-area-inset-bottom,0px)+var(--thread-response-height))] scroll-mt-[calc(var(--header-height)+min(200px,max(70px,20svh)))]" data-scroll-anchor="false" data-testid="conversation-turn-40" data-turn="assistant" data-turn-id="request-69f5a910-0b80-83e8-a6ca-d1c4f992669d-5" dir="auto">

केरल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने कांग्रेस के लिए लंबे समय बाद बड़ी राहत लेकर आए हैं।

140 सीटों वाले इस राज्य में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) को करीब 90 सीटों पर बढ़त मिलती दिख रही है। यह जीत सिर्फ एक राज्य में सरकार बनाने तक सीमित नहीं है। इसके साथ ही कांग्रेस ने 7 साल बाद वह स्थिति हासिल कर ली है, जब उसके पास एक साथ चार राज्यों में मुख्यमंत्री होंगे। 2019 के बाद यह पहला मौका है जब पार्टी का यह आंकड़ा फिर से 4 तक पहुंचा है, जो उसके लिए मनोवैज्ञानिक और राजनीतिक दोनों स्तर पर अहम माना जा रहा है।

कैसे बदली तस्वीर: रणनीति ने दिलाई जीत

केरल में कांग्रेस की जीत किसी एक फैक्टर का परिणाम नहीं है, बल्कि कई रणनीतिक फैसलों का संयुक्त असर है। सबसे अहम कदम रहा गठबंधन को मजबूत करना। चुनाव से पहले कांग्रेस ने स्थानीय स्तर पर तीन छोटी पार्टियों को अपने साथ जोड़ा, जिससे वोटों का बिखराव रुका। दूसरा बड़ा फैसला था अंदरूनी मतभेदों को दबाना। मुख्यमंत्री पद को लेकर पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को चुनाव के दौरान पूरी तरह नियंत्रित रखा गया। केसी वेणुगोपाल, रमेश चेन्निथल्ला और वीडी सतीशन जैसे नेता एकजुट होकर प्रचार करते दिखे। इससे मतदाताओं के बीच स्थिर नेतृत्व का संदेश गया।

वोट बैंक और नए चेहरे, दोनों पर फोकस

कांग्रेस ने इस चुनाव में सामाजिक समीकरणों को भी साधने की कोशिश की। बीजेपी के बढ़ते प्रभाव को मुद्दा बनाकर मुस्लिम और ईसाई मतदाताओं को अपने पक्ष में एकजुट किया गया। इसके साथ ही पार्टी ने नए चेहरों को मौका दिया और जमीनी स्तर पर डोर-टू-डोर कैंपेन पर जोर दिया। युवा और पढ़े-लिखे मतदाताओं तक पहुंचने के लिए सचिन पायलट जैसे नेताओं को जिम्मेदारी दी गई, जबकि कुछ इलाकों में इमरान प्रतापगढ़ी की सभाएं भी कराई गईं। इन प्रयासों ने मिलकर कांग्रेस को व्यापक समर्थन दिलाने में मदद की।

राष्ट्रीय स्तर पर क्या बदलेगा समीकरण

केरल की जीत का असर सिर्फ राज्य तक सीमित नहीं रहेगा। यह कांग्रेस के राष्ट्रीय राजनीतिक समीकरण को भी मजबूत करता है। एक समय था जब पार्टी के पास सिर्फ 2-3 राज्यों में ही सरकार बची थी। 2022 और 2023 के चुनावों के बाद स्थिति कुछ बेहतर हुई, लेकिन स्थिरता नहीं आ पाई। अब हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना और केरल-इन चार राज्यों में कांग्रेस की सरकार होने से पार्टी को संगठनात्मक और राजनीतिक मजबूती मिलेगी। यह जीत ऐसे समय आई है, जब पार्टी नेतृत्व को एक मजबूत नैरेटिव की जरूरत थी।

आम मतदाता के लिए क्या संकेत

केरल का यह चुनाव यह दिखाता है कि गठबंधन, नेतृत्व और जमीनी रणनीति अगर सही तरीके से लागू की जाए, तो राजनीतिक समीकरण बदले जा सकते हैं। मतदाता अब स्थानीय मुद्दों और स्थिर नेतृत्व को प्राथमिकता दे रहे हैं। यही कारण है कि कांग्रेस ने यहां अपनी पकड़ फिर से मजबूत की। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि पार्टी इस जीत को कैसे आगे बढ़ाती है और अन्य राज्यों में इसे किस तरह दोहराने की कोशिश करती है।

Dailyhunt
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Rajsatta Express