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केरल में RJD का सरप्राइज: कुथुपरमा सीट पर पीके प्रवीण आगे, वाम मोर्चे के साथ दिखा असर

केरल में RJD का सरप्राइज: कुथुपरमा सीट पर पीके प्रवीण आगे, वाम मोर्चे के साथ दिखा असर

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केरल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों में जहां कांग्रेस के नेतृत्व वाला UDF गठबंधन स्पष्ट बढ़त के साथ सत्ता की ओर बढ़ता दिख रहा है, वहीं एक दिलचस्प राजनीतिक संकेत भी सामने आया है।

बिहार की राजनीति से जुड़ी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने इस चुनाव में अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हुए सबका ध्यान खींचा है। दोपहर तक के रुझानों के मुताबिक UDF करीब 90 से ज्यादा सीटों पर आगे है, जबकि सत्तारूढ़ वाम मोर्चा (LDF) पीछे रह गया है। इस बीच LDF के सहयोगी के तौर पर चुनाव लड़ रही RJD ने एक सीट पर बढ़त बनाकर राजनीतिक हलकों में चर्चा बढ़ा दी है।

कुथुपरमा सीट पर RJD की मजबूत पकड़

RJD ने इस बार केरल में तीन सीटों-वडकारा, कुथुपरमा और कल्पेटा-पर उम्मीदवार उतारे थे। इनमें से कुथुपरमा सीट पर पार्टी के उम्मीदवार पीके प्रवीण मजबूत स्थिति में नजर आ रहे हैं। रुझानों के अनुसार, प्रवीण करीब 9 से 10 हजार वोटों की बढ़त बनाए हुए हैं, जिससे उनकी जीत लगभग तय मानी जा रही है। वहीं वडकारा और कल्पेटा में RJD दूसरे स्थान पर है, जो यह दिखाता है कि पार्टी ने सीमित सीटों पर भी प्रभाव छोड़ा है। यह प्रदर्शन इसलिए भी अहम है क्योंकि केरल में क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दलों के बीच प्रतिस्पर्धा काफी तीखी रहती है।

2021 की जीत का सिलसिला जारी?

कुथुपरमा सीट पर RJD की पकड़ नई नहीं है। 2021 के विधानसभा चुनाव में भी इस सीट पर पार्टी ने जीत दर्ज की थी। उस समय RJD उम्मीदवार केपी मोहान ने करीब 70 हजार वोट हासिल किए थे और IUML के उम्मीदवार को पीछे छोड़ दिया था। इस बार भी मुकाबला RJD और IUML के बीच ही रहा, लेकिन शुरुआती रुझान बताते हैं कि मतदाता फिर से RJD के पक्ष में झुकते नजर आ रहे हैं। यह लगातार प्रदर्शन यह संकेत देता है कि कुछ इलाकों में पार्टी ने स्थायी राजनीतिक आधार तैयार किया है।

कौन हैं पीके प्रवीण, जिन पर टिकी नजरें

कुथुपरमा सीट से RJD उम्मीदवार पीके प्रवीण पेशे से एक व्यवसायी हैं। उन्होंने अन्नामलाई यूनिवर्सिटी से एमए और एम.फिल की पढ़ाई की है। चुनाव आयोग में दाखिल हलफनामे के अनुसार, उनके पास लगभग 3.27 करोड़ रुपये की कुल संपत्ति है, जिसमें चल और अचल दोनों प्रकार की संपत्तियां शामिल हैं। उन पर करीब 15 लाख रुपये की देनदारी भी है। महत्वपूर्ण बात यह है कि उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है, जो उनकी छवि को साफ-सुथरा बनाता है।

राजनीतिक संकेत: छोटे दल भी बना रहे प्रभाव

केरल के इस चुनाव ने यह साफ कर दिया है कि बड़े गठबंधनों के बीच भी छोटे दल अपनी भूमिका निभा सकते हैं। RJD का प्रदर्शन इसी का उदाहरण है। आम मतदाता के नजरिए से यह स्थिति यह बताती है कि क्षेत्रीय मुद्दों और स्थानीय उम्मीदवारों का प्रभाव अभी भी मजबूत है। हालांकि, राज्य की सत्ता की तस्वीर कांग्रेस के पक्ष में जाती दिख रही है, लेकिन RJD की यह बढ़त आने वाले समय में उसकी रणनीति को नया दिशा दे सकती है।

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