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खेती में टेक्नोलॉजी का बढ़ता इस्तेमाल, बीज से डिजिटल मार्केट तक किसानों को मिल रहा आधुनिक सपोर्ट

खेती में टेक्नोलॉजी का बढ़ता इस्तेमाल, बीज से डिजिटल मार्केट तक किसानों को मिल रहा आधुनिक सपोर्ट

त्तर प्रदेश में खेती को आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं से जोड़ने के प्रयास तेज किए जा रहे हैं। बेहतर बीज, सोलर पंप, ड्रोन, किसान पाठशालाएं, फसल बीमा और डिजिटल मार्केटिंग जैसे उपायों के जरिए किसानों को खेत से लेकर बाजार तक सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।

बेहतर बीज से मजबूत शुरुआत

कृषि उत्पादन की नींव गुणवत्तापूर्ण बीज माने जाते हैं। बेहतर बीज उपलब्ध होने से किसानों को अच्छी बुवाई और बेहतर उत्पादन की संभावना बढ़ती है। इसी उद्देश्य से किसानों तक उच्च गुणवत्ता वाले बीज पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

सोलर पंप से सिंचाई को बढ़ावा

सिंचाई को आसान और किफायती बनाने के लिए प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत किसानों को सोलर पंप उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2017-18 से 2025 के बीच उत्तर प्रदेश में 86,128 सोलर पंप स्थापित किए गए, जिससे किसानों की सिंचाई सुविधाओं को मजबूती मिली है।

ड्रोन और आधुनिक मशीनरी का उपयोग

खेती में ड्रोन तकनीक का उपयोग फसल की निगरानी, दवा के छिड़काव और खेतों के आकलन के लिए बढ़ रहा है। प्रदेश में किसान उत्पादक संगठनों (FPO) और कृषि स्नातकों को ड्रोन खरीदने पर 40 से 50 प्रतिशत तक अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। वहीं, फार्म मशीनरी डीबीटी पोर्टल के माध्यम से छोटे किसानों को भी आधुनिक कृषि उपकरण किराये पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।

किसान पाठशालाओं से प्रशिक्षण

नई तकनीक और वैज्ञानिक खेती की जानकारी देने के लिए किसान पाठशालाओं का आयोजन किया जा रहा है। 2025-26 के दौरान 1,613 ग्राम पंचायत स्तरीय किसान पाठशालाओं में लगभग 15.20 लाख किसानों को प्रशिक्षण दिया गया, जिससे वे आधुनिक कृषि तकनीकों और सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर सके।

फसल बीमा से जोखिम में कमी

प्राकृतिक आपदाओं और मौसम संबंधी जोखिमों से किसानों को सुरक्षा देने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2017-18 से 2025-26 के बीच 353.14 लाख बीमित किसानों को लगभग ₹5,660.33 करोड़ का मुआवजा दिया गया।

पीएम-किसान से आर्थिक सहायता

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत पात्र किसानों को प्रति वर्ष ₹6,000 की आर्थिक सहायता तीन किस्तों में दी जाती है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 3.12 करोड़ किसानों को ₹99,000 करोड़ से अधिक की सहायता प्रदान की जा चुकी है।

ई-नाम और डिजिटल बाजार से जुड़ाव

फसल को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए राष्ट्रीय कृषि बाजार (e-NAM) प्लेटफॉर्म किसानों, व्यापारियों और मंडियों को डिजिटल रूप से जोड़ रहा है। इसके अलावा अमरोहा, वाराणसी और सहजनवा (गोरखपुर) में इंटीग्रेटेड पैक हाउस तथा राज्य में कई ग्रामीण हाट विकसित किए गए हैं, जिससे भंडारण, पैकेजिंग और विपणन सुविधाओं को मजबूती मिल रही है।

खेती में आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण, सिंचाई, बीमा और डिजिटल मार्केटिंग जैसे उपायों को जोड़कर किसानों को अधिक सक्षम बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इसका उद्देश्य खेती को अधिक उत्पादक, सुरक्षित और बाजार आधारित बनाना है।

नोट: यह विषय मूल रूप से ब्रांडेड कंटेंट/ब्रांड स्टूडियो सामग्री पर आधारित है। इसमें दिए गए दावे संबंधित सरकारी योजनाओं और उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों पर आधारित हैं।

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Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Rajsatta Express