पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में ज्यूडिशियल अफसरों को बंधक बनाए जाने की घटना अब राजनीतिक टकराव का बड़ा मुद्दा बन गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को आरोप लगाया कि असली दोषी फरार हैं, जबकि जांच एजेंसी NIA निर्दोष स्थानीय लोगों को परेशान कर रही है।
"50 निर्दोष युवाओं को उठाया गया"
मालदा के मानिकचक में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि:
- असली दोषी बच निकले
- NIA ने करीब 50 निर्दोष युवाओं को हिरासत में लिया
- जांच के नाम पर स्थानीय लोगों को परेशान किया जा रहा है
उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे सांप्रदायिक राजनीति की भूमिका है।
वोटर लिस्ट विवाद पर क्या बोलीं CM?
ममता बनर्जी ने लोगों से अपील की कि वे ज्यूडिशियल अफसरों का घेराव न करें। उन्होंने कहा कि जिनका नाम वोटर लिस्ट से हट गया है, वे: ट्रिब्यूनल में आवेदन देकर नाम दोबारा जुड़वा सकते हैं
रैली में जब उन्होंने पूछा कि कितनों का नाम सूची से हटा है, तो बड़ी संख्या में लोगों ने हाथ उठाए-जिस पर उन्होंने हैरानी जताई।
"उकसावे में न आएं"-BJP पर निशाना
CM ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी माहौल को भड़काने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि पहले हिंसा भड़काई जाती है और फिर केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बनाया जाता है।
क्या हुआ था मालदा में?
1 अप्रैल को मालदा के मोथाबाड़ी इलाके में:
- भीड़ ने ज्यूडिशियल अफसरों को करीब 9 घंटे तक बंधक बनाया
- सड़कों को जाम किया गया
- पुलिस और वाहनों पर हमला हुआ
इस घटना में अब तक 35 लोगों को राज्य CID ने गिरफ्तार किया है।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, NIA जांच
इस पूरे मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है और पश्चिम बंगाल प्रशासन को फटकार लगाई है। चुनाव आयोग के निर्देश पर अब इस केस की जांच NIA को सौंपी गई है।
चुनावी माहौल पर असर
पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल पहले से ही संवेदनशील है। ऐसे में मालदा की यह घटना और उसके बाद की राजनीति राज्य में तनाव को और बढ़ा सकती है।

