अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच Rahul Gandhi ने परमाणु हथियारों को लेकर कड़ी चेतावनी दी है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक दुनिया में ऐसा कोई भी बयान या कदम, जो "सभ्यता के अंत" की ओर इशारा करे, पूरी तरह अस्वीकार्य है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं और दुनिया भर में परमाणु युद्ध को लेकर चिंता बढ़ रही है।
ट्रंप के बयान से बढ़ी चिंता, 'सभ्यता खत्म हो सकती है'
इस तनाव की पृष्ठभूमि में Donald Trump का हालिया बयान है, जिसमें उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान ने Strait of Hormuz को नहीं खोला, तो बड़े पैमाने पर हमले हो सकते हैं। उन्होंने यहां तक कहा कि "पूरी सभ्यता खत्म हो सकती है," जिससे वैश्विक स्तर पर चिंता और बढ़ गई। हालांकि बाद में व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया कि परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का कोई संकेत नहीं दिया गया है।
परमाणु हथियारों पर साफ रुख: 'कभी भी जायज नहीं'
राहुल गांधी ने साफ शब्दों में कहा कि परमाणु हथियारों का इस्तेमाल किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता। उनका कहना है कि युद्ध भले ही वास्तविकता हो, लेकिन ऐसी भाषा और रणनीति, जो मानवता के अस्तित्व को खतरे में डाले, उसे पूरी तरह खारिज किया जाना चाहिए। यह बयान भारत की पारंपरिक नीति के अनुरूप भी माना जा रहा है, जिसमें परमाणु हथियारों के "No First Use" सिद्धांत को अपनाया गया है।
भारत का रुख: 'रणनीतिक संतुलन' या निष्क्रियता?
इस पूरे घटनाक्रम के बीच भारत सरकार ने संतुलित रुख अपनाया है। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। हालांकि विपक्ष, खासकर कांग्रेस, इसे "अपर्याप्त" और "नैतिक रूप से कमजोर" बता रहा है। राहुल गांधी पहले भी सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठा चुके हैं, खासकर तब जब पाकिस्तान ने खुद को मध्यस्थ के रूप में पेश करने की कोशिश की।
आर्थिक असर: भारत भी अछूता नहीं
इस संघर्ष का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। तेल आपूर्ति में बाधा के कारण कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है, जिससे LPG जैसी जरूरी चीजों की उपलब्धता प्रभावित हुई है। यह दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय संघर्ष का असर आम नागरिक तक सीधे पहुंचता है।
भारत की परमाणु नीति: संतुलन और जिम्मेदारी
भारत ने 1974 में पहली बार परमाणु परीक्षण किया था, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री Indira Gandhi थीं। इसके बाद 1998 में Atal Bihari Vajpayee के नेतृत्व में दूसरा परीक्षण हुआ। तब से भारत ने "No First Use" की नीति अपनाई है, यानी वह पहले परमाणु हथियार इस्तेमाल नहीं करेगा। राहुल गांधी का बयान इसी जिम्मेदार दृष्टिकोण को दोहराता नजर आता है।
आगे क्या? दुनिया की नजरें कूटनीति पर
फिलहाल, दुनिया इस बात पर नजर रखे हुए है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होता है या और बढ़ता है। राहुल गांधी का बयान एक तरह से वैश्विक नेताओं को याद दिलाता है कि युद्ध की सीमाएं होती हैं, लेकिन परमाणु हथियारों का इस्तेमाल उस सीमा को पूरी तरह खत्म कर सकता है।

