आज के समय में हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन एक बेहद आम स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है। इसकी सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कई लोगों को लंबे समय तक पता ही नहीं चलता कि उनका ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ है।
इसी कारण इसे अक्सर "साइलेंट किलर" कहा जाता है। व्यक्ति सामान्य रूप से काम करता रहता है, लेकिन शरीर के अंदर लगातार बढ़ा हुआ रक्तचाप दिल, दिमाग, किडनी और रक्त वाहिकाओं पर दबाव डालता रहता है।
हाई ब्लड प्रेशर हमेशा स्पष्ट लक्षण पैदा नहीं करता। फिर भी कुछ लोगों में सिरदर्द, चक्कर, धुंधला दिखाई देना, सांस फूलना या सीने में असहजता जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे संकेतों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है, खासकर जब ब्लड प्रेशर बहुत ज्यादा बढ़ जाए।
सबसे गंभीर स्थिति तब बनती है जब अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर दिमाग की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाकर स्ट्रोक का खतरा बढ़ा देता है।
आखिर हाई ब्लड प्रेशर क्या होता है?
जब रक्त लगातार धमनियों की दीवारों पर जरूरत से ज्यादा दबाव डालता है, तो इसे हाई ब्लड प्रेशर या हाइपरटेंशन कहा जाता है। ब्लड प्रेशर को आमतौर पर दो संख्याओं में मापा जाता है। पहली संख्या सिस्टोलिक और दूसरी डायस्टोलिक प्रेशर होती है।
एक बार ब्लड प्रेशर बढ़ जाने से हमेशा हाइपरटेंशन की पुष्टि नहीं होती। सही निदान के लिए अलग-अलग समय पर की गई रीडिंग और चिकित्सकीय मूल्यांकन महत्वपूर्ण होता है।
समस्या यह है कि कई लोगों में ब्लड प्रेशर काफी बढ़ने के बावजूद कोई खास लक्षण नहीं दिखाई देता। इसलिए केवल शरीर के संकेतों के आधार पर यह मान लेना सही नहीं है कि BP सामान्य है।
सिरदर्द को न करें हमेशा सामान्य
हाई ब्लड प्रेशर से जुड़े सबसे चर्चित लक्षणों में सिरदर्द का नाम लिया जाता है। खासकर जब रक्तचाप बहुत अधिक बढ़ जाए, तब कुछ लोगों को तेज सिरदर्द की शिकायत हो सकती है।
लेकिन यहां एक जरूरी बात समझना चाहिए-हर सिरदर्द हाई BP की वजह से नहीं होता। तनाव, माइग्रेन, नींद की कमी, डिहाइड्रेशन और कई अन्य कारण भी सिरदर्द पैदा कर सकते हैं।
अगर सिरदर्द अचानक बेहद तेज हो, पहले कभी ऐसा दर्द न हुआ हो या इसके साथ बोलने में परेशानी, कमजोरी, देखने में बदलाव अथवा भ्रम जैसे लक्षण हों, तो इसे आपात स्थिति मानकर तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
चक्कर और कमजोरी को नजरअंदाज न करें
ब्लड प्रेशर में गंभीर उतार-चढ़ाव के दौरान कुछ लोगों को चक्कर, कमजोरी या असामान्य बेचैनी महसूस हो सकती है। हालांकि ये लक्षण भी केवल हाई BP के लिए विशिष्ट नहीं हैं।
अगर अचानक शरीर के एक हिस्से में कमजोरी या सुन्नपन आने लगे, खासकर चेहरा, हाथ या पैर प्रभावित हो, तो स्ट्रोक की आशंका हो सकती है। ऐसी स्थिति में घर पर आराम करने या घरेलू उपाय आजमाने के बजाय तुरंत आपात चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।
धुंधला दिखाई देना भी हो सकता है संकेत
बहुत अधिक रक्तचाप आंखों और उनकी रक्त वाहिकाओं को भी प्रभावित कर सकता है। कुछ मामलों में धुंधला दिखाई देना या देखने में बदलाव महसूस हो सकता है।
अगर अचानक नजर कमजोर हो जाए, एक या दोनों आंखों से दिखाई देने में परेशानी हो या देखने का क्षेत्र बदल जाए, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए। अचानक होने वाला विजन लॉस स्ट्रोक सहित कई आपात स्थितियों का संकेत हो सकता है।
सांस फूलना और सीने में परेशानी
लंबे समय तक अनियंत्रित हाई BP दिल पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। इससे समय के साथ हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
कुछ लोगों में सांस फूलना, बहुत जल्दी थक जाना या सीने में असहजता जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। खासकर सीने में दबाव या दर्द के साथ सांस लेने में परेशानी, पसीना, मतली या कमजोरी हो तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
कब हाई BP बन सकता है स्ट्रोक की वजह?
हाई ब्लड प्रेशर स्ट्रोक के सबसे महत्वपूर्ण नियंत्रित किए जा सकने वाले जोखिम कारकों में से एक है। लंबे समय तक बढ़ा हुआ BP रक्त वाहिकाओं की दीवारों को कमजोर या क्षतिग्रस्त कर सकता है और धमनियों में बदलाव ला सकता है।
इसके परिणामस्वरूप दिमाग की किसी रक्त वाहिका में क्लॉट बनने या रक्त प्रवाह बाधित होने से इस्केमिक स्ट्रोक हो सकता है। दूसरी ओर, कमजोर रक्त वाहिका फटने पर हेमरेजिक स्ट्रोक हो सकता है।
यानी हाई BP सीधे हर व्यक्ति में स्ट्रोक नहीं करता, लेकिन लंबे समय तक अनियंत्रित रहने पर स्ट्रोक का जोखिम काफी बढ़ सकता है।
स्ट्रोक के संकेत कैसे पहचानें?
स्ट्रोक की स्थिति में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है। इसके कुछ प्रमुख संकेत अचानक दिखाई दे सकते हैं:
चेहरे का एक हिस्सा टेढ़ा या सुन्न होना
एक हाथ या पैर में अचानक कमजोरी या सुन्नपन
बोलने या बात समझने में परेशानी
अचानक दिखाई देने में समस्या
अचानक चलने या संतुलन बनाने में परेशानी
बिना स्पष्ट कारण के अचानक बहुत तेज सिरदर्द
ऐसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत आपात चिकित्सा सेवा लें। लक्षण कुछ मिनट बाद ठीक हो जाएं, तब भी इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक (TIA) का संकेत हो सकता है।
हाई BP से बचने के लिए क्या करें?
ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने के लिए नियमित जांच सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक है। जिन लोगों को हाई BP की समस्या है, उन्हें डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं नियमित रूप से लेनी चाहिए और बिना सलाह के दवा बंद नहीं करनी चाहिए।
इसके साथ ही नमक का सेवन कम करना, संतुलित आहार लेना, नियमित शारीरिक गतिविधि करना, स्वस्थ वजन बनाए रखना, धूम्रपान से बचना और शराब का सेवन सीमित या बंद करना BP नियंत्रण में मदद कर सकता है।
तनाव और पर्याप्त नींद पर ध्यान देना भी समग्र हृदय स्वास्थ्य के लिए उपयोगी है।
घर पर BP चेक करते समय इन बातों का रखें ध्यान
ब्लड प्रेशर की सही रीडिंग के लिए कुछ सावधानियां जरूरी हैं। मापने से पहले कुछ मिनट आराम करें। कुर्सी पर सीधे बैठें और पैर जमीन पर रखें। बांह को उचित स्थिति में रखें और सही आकार का कफ इस्तेमाल करें।
एक ही रीडिंग देखकर घबराने के बजाय डॉक्टर की सलाह के अनुसार अलग-अलग समय पर BP की निगरानी करना ज्यादा उपयोगी होता है।
बहुत ज्यादा BP होने पर क्या करें?
अगर ब्लड प्रेशर की रीडिंग 180/120 mmHg या उससे अधिक आती है, तो कुछ मिनट आराम करके दोबारा BP जांचना चाहिए। अगर रीडिंग फिर भी इतनी ही ऊंची है, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
और अगर इतनी ऊंची रीडिंग के साथ सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी, कमजोरी या सुन्नपन, बोलने में कठिनाई, देखने में बदलाव, भ्रम या अन्य गंभीर लक्षण मौजूद हों, तो तुरंत आपात चिकित्सा सहायता लें। ऐसी स्थिति में केवल घर पर BP कम करने की कोशिश करके समय गंवाना उचित नहीं है।
हाई ब्लड प्रेशर ऐसी बीमारी है जो कई बार बिना किसी स्पष्ट संकेत के शरीर को नुकसान पहुंचाती रहती है। यही वजह है कि नियमित BP जांच बेहद महत्वपूर्ण है। सिरदर्द, चक्कर, धुंधला दिखाई देना या कमजोरी जैसे लक्षण कई कारणों से हो सकते हैं, इसलिए उन्हें देखकर खुद से हाई BP का निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए।
लेकिन अगर अचानक चेहरे, हाथ या पैर में कमजोरी, बोलने में परेशानी, देखने में बदलाव, संतुलन बिगड़ना या बेहद तेज सिरदर्द जैसे लक्षण दिखाई दें, तो यह स्ट्रोक की आपात स्थिति हो सकती है। ऐसे समय पर हर मिनट महत्वपूर्ण होता है और तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जिंदगी बचाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

