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करोड़ों लोगों की सांसें थमीं! RBI का अगला कदम बना देश का सबसे बड़ा आर्थिक सस्पेंस

करोड़ों लोगों की सांसें थमीं! RBI का अगला कदम बना देश का सबसे बड़ा आर्थिक सस्पेंस

देशभर के करोड़ों बैंक ग्राहकों, होम लोन धारकों, कारोबारियों और निवेशकों की नजर इस समय भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक पर टिकी हुई है। 3 अगस्त से शुरू हुई इस बैठक का सबसे अहम फैसला 5 अगस्त को सामने आएगा।

माना जा रहा है कि इस एक फैसले का असर सीधे करोड़ों लोगों की जेब, बैंक लोन, EMI, शेयर बाजार और देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

हालांकि अधिकांश अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि RBI इस बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करेगा, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों और महंगाई के दबाव को देखते हुए बाजार पूरी तरह सतर्क है। यदि RBI उम्मीद के विपरीत कोई बड़ा फैसला लेता है तो इसका असर अगले ही दिन शेयर बाजार से लेकर बैंकिंग सेक्टर तक दिखाई दे सकता है।

आखिर रेपो रेट होता क्या है?

रेपो रेट वह ब्याज दर होती है जिस पर भारतीय रिजर्व बैंक देश के बैंकों को अल्पकालिक अवधि के लिए पैसा उधार देता है। जब RBI रेपो रेट बढ़ाता है तो बैंकों के लिए कर्ज महंगा हो जाता है। इसका असर आम लोगों के होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन और बिजनेस लोन पर भी पड़ता है।

इसके विपरीत यदि रेपो रेट घटाया जाता है तो बैंक सस्ता कर्ज दे सकते हैं और EMI कम होने की संभावना बढ़ जाती है।

इस बार क्यों खास है MPC की बैठक?

पिछले कुछ महीनों में भारत की अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों से गुजर रही है। एक तरफ खाद्य महंगाई और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, वहीं दूसरी ओर वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव भी आर्थिक माहौल को प्रभावित कर रहे हैं।

इसी वजह से RBI के सामने दोहरी चुनौती है-

  • महंगाई को नियंत्रित रखना।

  • आर्थिक विकास की गति बनाए रखना।

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यही संतुलन इस बार RBI के फैसले को बेहद महत्वपूर्ण बना रहा है।

क्या इस बार बढ़ेगी ब्याज दर?

अधिकांश विशेषज्ञों का अनुमान है कि RBI फिलहाल रेपो रेट को मौजूदा स्तर पर ही बनाए रख सकता है।

इसके पीछे कई प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं-

  • आर्थिक विकास को समर्थन देना।

  • निवेश गतिविधियों को प्रभावित होने से बचाना।

  • वैश्विक अनिश्चितताओं का असर कम करना।

  • रुपये की स्थिरता बनाए रखना।

हालांकि अंतिम फैसला पूरी तरह मौद्रिक नीति समिति पर निर्भर करेगा।

EMI पर क्या होगा असर?

यदि रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होता है तो फिलहाल-

  • होम लोन की EMI में बदलाव की संभावना कम रहेगी।

  • ऑटो लोन की ब्याज दरें स्थिर रह सकती हैं।

  • बिजनेस लोन लेने वालों को राहत मिल सकती है।

  • नए कर्ज लेने वालों को भी तत्काल अतिरिक्त बोझ नहीं उठाना पड़ेगा।

लेकिन यदि RBI अप्रत्याशित रूप से ब्याज दर बढ़ाता है तो बैंक धीरे-धीरे अपनी लोन दरों में बदलाव कर सकते हैं।

शेयर बाजार क्यों है बेचैन?

भारतीय शेयर बाजार हर मौद्रिक नीति पर बारीकी से नजर रखता है।

यदि ब्याज दरें स्थिर रहती हैं तो निवेशकों का भरोसा मजबूत हो सकता है और बैंकिंग, रियल एस्टेट, ऑटो तथा वित्तीय सेवाओं से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में सकारात्मक माहौल बन सकता है।

वहीं यदि ब्याज दर बढ़ती है तो बाजार में शुरुआती उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है क्योंकि महंगे कर्ज का असर कंपनियों की लागत और मुनाफे पर पड़ सकता है।

महंगाई सबसे बड़ी चिंता

हाल के महीनों में खाद्य वस्तुओं और ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी ने महंगाई को फिर से चर्चा में ला दिया है।

RBI लगातार यह देख रहा है कि महंगाई अस्थायी है या लंबे समय तक बनी रह सकती है।

यदि आने वाले महीनों में महंगाई तेजी से बढ़ती है तो भविष्य में ब्याज दरों पर दोबारा विचार किया जा सकता है।

वैश्विक घटनाओं का भी असर

भारत केवल घरेलू परिस्थितियों के आधार पर ब्याज दर तय नहीं करता।

RBI निम्न बातों पर भी नजर रखता है-

  • कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें।

  • अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियां।

  • डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति।

  • वैश्विक निवेश का प्रवाह।

  • अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक माहौल।

इन सभी कारकों का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

बैंक ग्राहकों को क्या करना चाहिए?

यदि आपके पास पहले से होम लोन या अन्य बैंक लोन है तो घबराने की आवश्यकता नहीं है।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं-

  • RBI के आधिकारिक फैसले का इंतजार करें।

  • अफवाहों के आधार पर वित्तीय निर्णय न लें।

  • यदि फ्लोटिंग रेट लोन है तो बैंक की नई ब्याज दरों पर नजर रखें।

  • लंबी अवधि की वित्तीय योजना बनाकर चलें।

निवेशकों के लिए क्या संकेत?

शेयर बाजार के निवेशकों के लिए यह सप्ताह बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

यदि RBI संतुलित और स्थिर नीति अपनाता है तो इससे बाजार में सकारात्मक माहौल बन सकता है। वहीं किसी अप्रत्याशित फैसले की स्थिति में शुरुआती अस्थिरता देखने को मिल सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि केवल एक दिन के उतार-चढ़ाव के आधार पर निवेश का निर्णय लेना उचित नहीं होगा। लंबी अवधि के निवेशकों को मजबूत कंपनियों और विविध पोर्टफोलियो पर ध्यान देना चाहिए।

आगे क्या?

5 अगस्त को RBI गवर्नर द्वारा मौद्रिक नीति की घोषणा के बाद पूरे देश की नजर इस बात पर होगी कि-

  • रेपो रेट में बदलाव हुआ या नहीं।

  • महंगाई को लेकर RBI का नया अनुमान क्या है।

  • आर्थिक विकास को लेकर क्या संकेत दिए गए हैं।

  • आने वाले महीनों के लिए केंद्रीय बैंक का रुख कैसा रहेगा।

यही घोषणाएं तय करेंगी कि आने वाले समय में बैंकिंग सेक्टर, शेयर बाजार और आम उपभोक्ताओं की वित्तीय स्थिति किस दिशा में आगे बढ़ेगी। फिलहाल अधिकांश विशेषज्ञों की राय है कि RBI इस बार यथास्थिति बनाए रख सकता है, लेकिन अंतिम निर्णय 5 अगस्त की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।

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Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Rangin Duniyan