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नाक से घुसता है मौत का यह अदृश्य दुश्मन! दिमाग तक पहुंचते ही इंसान भूल जाता है अपनी पहचान, दुनिया भर में बढ़ा खतरा

नाक से घुसता है मौत का यह अदृश्य दुश्मन! दिमाग तक पहुंचते ही इंसान भूल जाता है अपनी पहचान, दुनिया भर में बढ़ा खतरा

दुनिया भर में एक ऐसा सूक्ष्म जीव तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है, जो आकार में बेहद छोटा होने के बावजूद इंसान के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। इस खतरनाक जीव का नाम नेगलेरिया फाउलेरी (Naegleria fowleri) है, जिसे आम भाषा में 'ब्रेन-ईटिंग अमीबा' यानी दिमाग खाने वाला अमीबा कहा जाता है।

यह जीव पानी के जरिए इंसान के शरीर में प्रवेश करता है और कुछ ही दिनों में दिमाग तक पहुंचकर गंभीर संक्रमण पैदा कर देता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि संक्रमण तेजी से बढ़ जाए तो मरीज की जान बचाना बेहद मुश्किल हो जाता है।

पिछले वर्ष केरल सहित भारत के कई हिस्सों में इसके मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी थी। दुनिया भर में भी इसके संक्रमण को लेकर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

क्या है नेगलेरिया फाउलेरी?

नेगलेरिया फाउलेरी एक एककोशिकीय सूक्ष्म जीव (Amoeba) है, जो मुख्य रूप से गर्म और मीठे पानी में पाया जाता है। यह सामान्य परिस्थितियों में इंसान को नुकसान नहीं पहुंचाता, लेकिन जब दूषित पानी नाक के जरिए शरीर में प्रवेश करता है, तब यह सूंघने वाली नस (Olfactory Nerve) के रास्ते सीधे दिमाग तक पहुंच सकता है।

यह अमीबा दिमाग के ऊतकों पर हमला करता है और उन्हें नष्ट करने लगता है। इसी कारण इसे "ब्रेन-ईटिंग अमीबा" कहा जाता है। हालांकि यह वास्तव में दिमाग को खाता नहीं है, बल्कि दिमाग के ऊतकों को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाता है।

कहां पनपता है यह खतरनाक अमीबा?

विशेषज्ञों के अनुसार यह अमीबा निम्न स्थानों पर अधिक पाया जाता है-

  • गर्म पानी की झीलें

  • तालाब और झरने

  • साफ-सफाई रहित स्विमिंग पूल

  • दूषित वाटर पार्क

  • इनडोर सर्फिंग फैसिलिटी

  • खराब रखरखाव वाले स्प्लैश पैड

जब पानी का तापमान बढ़ता है, तब यह सूक्ष्म जीव अधिक सक्रिय हो जाता है। इसी वजह से गर्मियों और बरसात के मौसम में इसका खतरा बढ़ सकता है।

नाक के रास्ते सीधे दिमाग तक पहुंचता है संक्रमण

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह संक्रमण पानी पीने से नहीं फैलता।

खतरा तब होता है जब दूषित पानी तेज गति से नाक के अंदर चला जाता है। नाक के भीतर मौजूद सूंघने वाली नस के जरिए यह अमीबा सीधे मस्तिष्क तक पहुंच जाता है। वहां पहुंचकर यह दिमाग के ऊतकों में सूजन और गंभीर संक्रमण पैदा करता है।

इस बीमारी को चिकित्सा विज्ञान में प्राइमरी अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस (Primary Amoebic Meningoencephalitis - PAM) कहा जाता है।

कुछ ही दिनों में बिगड़ सकती है मरीज की हालत

इस संक्रमण की सबसे खतरनाक बात इसकी तेज रफ्तार है।

संक्रमण होने के बाद शुरुआती कुछ दिनों में मरीज को सामान्य वायरल बीमारी जैसा महसूस हो सकता है। लेकिन धीरे-धीरे स्थिति बेहद गंभीर होने लगती है।

क्या हैं इसके शुरुआती लक्षण?

शुरुआत में मरीज में निम्न लक्षण दिखाई दे सकते हैं-

  • तेज सिरदर्द

  • लगातार बुखार

  • उल्टी

  • मतली

  • गर्दन में अकड़न

  • कमजोरी

चूंकि ये लक्षण मेनिनजाइटिस से मिलते-जुलते हैं, इसलिए शुरुआती चरण में बीमारी की पहचान करना कठिन हो सकता है।

बाद में दिखने लगते हैं डरावने लक्षण

यदि संक्रमण तेजी से बढ़ता है तो मरीज में गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्याएं दिखाई देने लगती हैं।

इनमें शामिल हैं-

  • भ्रम की स्थिति

  • याददाश्त कमजोर होना

  • अजीब चीजें दिखाई देना

  • व्यवहार में अचानक बदलाव

  • परिवार वालों को पहचानना बंद कर देना

  • बोलने में परेशानी

  • दौरे पड़ना

  • बेहोशी

  • कोमा

कई मामलों में मरीज अपनी पहचान तक भूल जाता है और कुछ ही दिनों में उसकी स्थिति अत्यंत गंभीर हो जाती है।

मौत की दर बेहद ज्यादा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार नेगलेरिया फाउलेरी संक्रमण दुनिया की सबसे घातक दुर्लभ बीमारियों में गिना जाता है।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार पिछले कई दशकों में दुनिया भर में इसके सीमित मामले सामने आए हैं, लेकिन संक्रमित मरीजों में मृत्यु दर लगभग 97 प्रतिशत बताई जाती है। इसका कारण यह है कि बीमारी बहुत तेजी से बढ़ती है और अक्सर तब तक पहचान में आती है जब तक संक्रमण काफी आगे बढ़ चुका होता है।

हालांकि यह बीमारी बेहद दुर्लभ है, इसलिए सामान्य परिस्थितियों में इसके संक्रमित होने की संभावना बहुत कम रहती है।

भारत में क्यों बढ़ी चिंता?

पिछले कुछ वर्षों में भारत के कई राज्यों में इसके मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग अधिक सतर्क हो गया है।

विशेष रूप से केरल में सामने आए मामलों ने इस संक्रमण की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित किया। गर्म जलवायु, बारिश के मौसम और कुछ स्थानों पर दूषित जल स्रोतों के कारण विशेषज्ञ लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।

हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि हर झील, हर तालाब या हर स्विमिंग पूल में यह अमीबा मौजूद नहीं होता। इसलिए घबराने की बजाय वैज्ञानिक जानकारी और सावधानी अपनाना सबसे जरूरी है।

गर्म इलाकों से ठंडे देशों तक पहुंचा खतरा

पहले यह माना जाता था कि यह अमीबा केवल गर्म क्षेत्रों में पाया जाता है।

लेकिन हाल के वर्षों में अमेरिका के कुछ अपेक्षाकृत ठंडे राज्यों, यूरोप के कई देशों तथा एशिया के कुछ हिस्सों में भी इसके मामले सामने आने के बाद वैज्ञानिक यह अध्ययन कर रहे हैं कि बदलते मौसम और तापमान का इसके फैलाव पर क्या प्रभाव पड़ रहा है।

जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान को लेकर भी विशेषज्ञ लगातार शोध कर रहे हैं।

क्या इसका इलाज संभव है?

चिकित्सकों के अनुसार यदि संक्रमण की पहचान बहुत शुरुआती चरण में हो जाए तो कुछ विशेष दवाओं और गहन चिकित्सा की मदद से इलाज का प्रयास किया जाता है।

हालांकि बीमारी इतनी तेजी से बढ़ती है कि अधिकांश मामलों में इलाज शुरू होने तक संक्रमण काफी गंभीर हो चुका होता है। इसलिए सबसे प्रभावी उपाय बचाव ही माना जाता है।

कैसे करें बचाव?

विशेषज्ञों ने लोगों को कुछ आसान लेकिन महत्वपूर्ण सावधानियां अपनाने की सलाह दी है-

  • गंदे और ठहरे हुए पानी में नहाने से बचें।

  • खराब रखरखाव वाले स्विमिंग पूल का उपयोग न करें।

  • प्राकृतिक गर्म झीलों और झरनों में सावधानी बरतें।

  • पानी में छलांग लगाते समय कोशिश करें कि पानी तेज गति से नाक में न जाए।

  • आवश्यकता होने पर नाक क्लिप (Nose Clip) का उपयोग किया जा सकता है।

  • बच्चों को दूषित जल स्रोतों में खेलने से रोकें।

  • केवल साफ और सुरक्षित जल स्रोतों का उपयोग करें।

  • यदि पानी में नहाने के बाद तेज सिरदर्द, बुखार या उल्टी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

घबराएं नहीं, सतर्क रहें

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि नेगलेरिया फाउलेरी संक्रमण बेहद दुर्लभ है। इसलिए केवल खबरें पढ़कर घबराने की जरूरत नहीं है। सबसे जरूरी बात यह है कि लोग सही जानकारी रखें और साफ-सफाई वाले जल स्रोतों का ही उपयोग करें।

यदि उचित सावधानी बरती जाए, दूषित पानी से बचा जाए और शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न किया जाए, तो इस खतरनाक संक्रमण के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। जागरूकता, स्वच्छता और समय पर चिकित्सकीय सलाह ही इस जानलेवा अमीबा से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

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Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Rangin Duniyan