अक्षय तृतीया 2026: कब है सही तिथि, सोना-चांदी खरीदने का शुभ समय और महत्व
Akshaya Tritiya 2026 (Akha Teej Date & Muhurat): हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया को सबसे शुभ दिनों में से एक माना जाता है।
इस दिन बिना किसी मुहूर्त के भी शुभ कार्य किए जा सकते हैं। "अक्षय" का अर्थ होता है - जो कभी समाप्त न हो, यानी इस दिन किया गया कार्य हमेशा फल देता है। मान्यता है कि इस दिन किया गया कोई भी कार्य, विशेष रूप से खरीददारी या निवेश, स्थायी रूप से फल देता है और उसमें निरंतर वृद्धि होती है। इसी कारण इस दिन लोग अपनी योग्यता के अनुसार सोना-चांदी आदि खरीदते हैं। अगर सोना खरीदना संभव न हो तो चांदी, पीतल या अन्य शुभ वस्तुएं भी खरीदी जा सकती हैं। इस दिन थोड़ा-बहुत निवेश करना भी शुभ माना जाता है। इस साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि दो दिन होने के कारण अक्षय तृतीया की तिथि को लेकर काफी असमंसज की स्थिति बनी हुई है। जानें अक्षय तृतीया की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, सोना-चांदी खरीदने का समय से लेकर अन्य जानकारी…धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अक्षय तृतीया के दिन भगवान परशुराम का जन्म हुआ था। इसके अलावा इस दिन माता अन्नपूर्णा का प्राकट्य हुआ थाऔर भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों को अक्षय पात्र प्रदान किया था,जिससे कभी भोजन समाप्त नहीं होता था। यही कारण है कि इस दिन बर्तन खरीदने की परंपरा भी है। इतना ही नहीं कहा जाता है कि इसी दिन सुदामा और श्रीकृष्ण का मिलन हुआ था और त्रेता युग की शुरुआत भी इसी दिन मानी जाती है। इस प्रकार अक्षय तृतीया एक अत्यंत शुभ और फलदायी दिन है। इस दिन पूजा-पाठ, धार्मिक ग्रंथों का पाठ, मंदिर दर्शन आदि करना उत्तम माना जाता है।
अक्षय तृतीया 2026 कब है?
पंचांग के अनुसार-
तिथि: 19 अप्रैल 2026 (रविवार)
तृतीया तिथि प्रारंभ: 19 अप्रैल 2026, सुबह 10:49 बजे
तृतीया तिथि समाप्त: 20 अप्रैल 2026, सुबह 07:27 बजे
उदया तिथि के अनुसार 19 अप्रैल को ही अक्षय तृतीया मनाई जाएगी।
सोना-चांदी खरीदने का शुभ मुहूर्त
शुभ समय शुरू: 19 अप्रैल सुबह 10:49 बजे से
मुख्य पूजा मुहूर्त: 10:49 AM - 12:20 PM
मान्यता है कि इस समय सोना या चांदी खरीदने से धन में लगातार वृद्धि होती है।
अक्षय तृतीया का धार्मिक महत्व
अक्षय तृतीया को हिंदू धर्म में 'अबूझ मुहूर्त' माना जाता है, यानी ऐसा शुभ समय जिसमें किसी भी मांगलिक कार्य के लिए पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं होती। इसे वर्ष के साढ़े तीन सबसे शुभ मुहूर्तों में गिना जाता है। इन विशेष मुहूर्तों में चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा, आश्विन मास की दशमी, वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया यानी अक्षय तृतीया और कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा शामिल हैं। इनमें से पहली तीन तिथियां पूर्ण मुहूर्त मानी जाती हैं, जबकि चौथी तिथि को आधा मुहूर्त कहा जाता है।
इसी वजह से ये साढ़े तीनों तिथियां पूरे वर्ष में अत्यंत पवित्र और शुभ मानी जाती हैं। अक्षय तृतीया के दिन विवाह, मुंडन, कर्ण छेदन, गृह प्रवेश जैसे सभी 16 संस्कार करना विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है। इसके अलावा इस दिन सोना-चांदी, संपत्ति या वाहन खरीदना भी शुभ फल देने वाला माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन किए गए कार्यों पर मां लक्ष्मी की विशेष कृपा रहती है, जिससे जीवन में सुख, समृद्धि और वैभव बढ़ता है।

