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जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने संभाला देश के नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का पदभार

जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने संभाला देश के नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का पदभार

नई दिल्ली, 31 मई। जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि ने रविवार को देश के नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) का पद संभाल लिया। उन्होंने ऐसे वक्त में यह पद संभाला है, जब भारतीय सेना कई बड़े बदलावों से गुजर रही है।

उन्हें पूर्ववर्ती सीडीएस के अधूरे कामों को भी पूरा करना होगा।

पाकिस्तान और चीन से जुड़े रणनीतिक मामलों के जानकार

सुब्रमणि को पाकिस्तान और चीन से जुड़े रणनीतिक मामलों का जानकार माना जाता है। उन्हें भारतीय सेना के नॉर्दन कमांड के साथ ही सेंट्रल कमांड का भी अनुभव है और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में सैन्य सलाहकार की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। लेकिन अब सीडीएस के तौर पर उनकी असली परीक्षा संस्थागत सुधारों में होगी। वैसे तो आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के बीच ज्वॉइंटनेस और समन्वय को लेकर लगातार काम हो रहा है, लेकिन 'ऑपेरशन सिंदूर' के बाद इस पर फोकस और ज्यादा बढ़ा है।

थिएटर कमांड का अधूरा काम पूरा करना है

देश के तीसरे सीडीएस सुब्रमणि के सामने सबसे बड़ी चुनौती इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड को जमीन पर उतारने की होगी। यह योजना काफी सालों से चल रही है। अब इसका एक ब्लू प्रिंट तैयार कर रक्षा मंत्रालय को सौंप भी दिया गया है। लेकिन यह जमीन पर कैसे लागू होगा क्या कमांड स्ट्रक्चर होगा, ये अभी भी जटिल सवाल बना हुआ है।

कुछ दिनों पहले ही पूर्व सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने कहा था कि ढांचागत बदलाव सबसे बड़ी चुनौती हैं। असली चुनौती हमेशा सोच और मानसिकता बदलने की रही है। अगर लोगों की सोच बदल जाए तो बाकी बदलाव अपने आप होने लगते हैं। उन्होंने कहा था कि थिएटर कमांड की प्रक्रिया में हम दूसरे देशों से करीब 10 से 15 साल पीछे हैं। अगर हम काम एक एक करके करेंगे तो इसमें बहुत ज्यादा वक्त लग जाएगा। इसलिए हमारी कोशिश है कि कई काम एक साथ किए जाएं।

तीनों सेनाओं के बीच वास्तविक ज्वॉइंटनेस

अभी भारतीय सशस्त्र बलों में कुल 17 सिंगल सर्विस कमांड हैं। भारतीय सेना के पास 6 ऑपरेशनल और 1 ट्रेनिंग कमांड है। भारतीय वायु सेना के पास 5 ऑपरेशनल, 1 ट्रेनिंग और 1 मेंटेनेंस कमांड है। भारतीय नौसेना के पास 2 ऑपरेशनल और 1 ट्रेनिंग कमांड है। थिएटर कमांड बनाने के बाद भी तीनों सेनाओं की कार्यसंस्कृति, प्रशिक्षण, लॉजिस्टिक्स और खरीद प्रक्रियाओं में तालमेल स्थापित करना भी एक अहम टास्क होगा।

आत्मनिर्भरता और आधुनिकीकरण

नए सीडीएस के सामने तीनों सेनाओं के आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भरता दोनों में सामंजस्य बैठाना भी एक चुनौती होगी। डिफेंस सेक्टर में लगातार आत्मनिर्भरता पर जो दिया जा रहा है। लेकिन ये भी हकीकत है कि सेनाएं हथियार सहित जरूरी सैन्य उपकरणों की डिलीवरी में हो रही देरी का मसला भी उठाती रही है। एयरफोर्स को ही देखें तो स्वदेशी फाइटर जेट तेजस मार्क-1ए मिलने में दो साल से भी ज्यादा देरी हो गई है। इसी तरह कई और सैन्य उपकरण मिलने की टाइमलाइन आगे खिसकती रहती है। सीडीएस को यह भी देखना होगा कि आत्मनिर्भरता बढ़ाने के साथ ही आधुनिकीकरण की रफ्तार प्रभावित ना हो।

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