नई दिल्ली, 3 अप्रैल। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि सरकार ने पश्चिम बंगाल व तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के नतीजों को प्रभावित करने तथा चुनावी लाभ हासिल करने के लिए संसद के बजट सत्र की अवधि बढ़ा दी है और 'विशेष सत्र'' बुलाया है, जो चुनाव आचार संहिता का घोर उल्लंघन है।
परिसीमन की प्रक्रिया में जल्दबाजी के 'खतरनाक' नतीजे होंगे
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में जोर देकर कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया में जल्दबाजी के 'खतरनाक' नतीजे होंगे तथा 'हम राज्य स्तर पर लोकसभा सीटों की संख्या के तुलनात्मक अंतर में बदलाव नहीं चाहते। यह जानकारी भी मिली है कि लोकसभा की सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत की समानुपातिक वृद्धि की जाएगी और यदि ऐसा होता है तो दक्षिण, पश्चिम और पूर्वोत्तर भारत के छोटे राज्यों को नुकसान होगा।'
महिला आरक्षण अधिनियम में संशोधन कर दोबारा श्रेय लेना चाहते हैं पीएम मोदी
जयराम रमेश ने यह दावा भी किया कि महिला आरक्षण के विषय पर सरकार 30 महीने बाद जागी है तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महिला आरक्षण अधिनियम में संशोधन करके दोबारा श्रेय लेना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन के साथ परिसीमन का भी एकतरफा फैसला किया जबकि इस बारे में विपक्ष के साथ कोई बातचीत नहीं की।
संसद के दोनों सदनों की अगली बैठकों 16-18 अप्रैल तक होंगी
उल्लेखनीय है कि महिला आरक्षण विधेयक पारित करने के लिए गुरुवार को संसद का वर्तमान बजट सत्र बढ़ा दिया गया और अब लोकसभा तथा राज्यसभा की अगली बैठक 16 अप्रैल को होगी। दोनों सदनों की तीन दिवसीय बैठक 16 से 18 अप्रैल के बीच हो सकती है। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, संसद का वर्तमान बजट सत्र गुरुवार, दो अप्रैल को ही संपन्न होना था।
विधानसभा चुनाव के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाने का आग्रह किया गया था
कांग्रेस महासचिव रमेश ने विपक्ष और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के बीच हुए पत्राचार का उल्लेख करते हुए कहा कहा कि सरकार से यह आग्रह किया था कि 29 अप्रैल को विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए, लेकिन सरकार यह मन बना चुकी थी कि 'विशेष सत्र' बुलाया जाएगा और ऐसे में एकतरफा निर्णय लिया गया कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के विधानसभा चुनाव से पहले और आचार संहिता लागू रहने के समय 'विशेष सत्र' बुलाया जाएगा।
परिसीमन को लेकर भी है यह विशेष सत्र
उन्होंने कहा, 'यह जानकारी भी मिली है कि यह विशेष सत्र सिर्फ महिला आरक्षण अधिनियम को लेकर नहीं, बल्कि परिसीमन को लेकर भी है जबकि परिसीमन के बारे में पहले कोई बात नहीं की गई थी। उन्होंने कहा, '2023 में विशेष सत्र बुलाकर नारी शक्ति अधिनियम पारित कराया गया था और कहा गया था कि जनगणना और परिसीमन के बाद महिला आरक्षण लागू होगा। उस वक्त खरगे जी ने कहा था कि महिला आरक्षण को तत्काल लागू किया जा सकता है। इस प्रकार देखें तो 30 महीने तक सरकार सोती रही और अब कह रही है कि नई जनगणना से पहले इसे लागू किया जाएगा क्योंकि जनगणना में तीन-चार वर्ष लगेंगे।
यह कहना बिल्कुल गलत कि जनगणना में 3-4 वर्ष का समय लगेगा
रमेश ने जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार के एक बयान का हवाला देते हुए कहा कि यह कहना बिल्कुल गलत है कि जनगणना में तीन-चार वर्ष का समय लगेगा क्योंकि 2027 में अधिकतम आंकड़े आ जाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि इस 'विशेष सत्र' को चुनावी लाभ लेने के लिए और पश्चिम बंगाल तथा तमिलनाडु के विधानसभा चुनाव परिणाम को प्रभावित करने के वास्ते बुलाया गया है।
कांग्रेस नेता ने कहा, 'यह चुनावी सत्र है, जिसमें प्रधानमंत्री यह श्रेय लेंगे कि मैं महिला आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करूंगा। उन्होंने आरोप लगाया कि यह चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन है। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में 23 व 29 अप्रैल को दो चरणों में और तमिलनाडु में 23 अप्रैल को विधानसभा चुनाव होना है।
जल्द ही कांग्रेस व फिर विपक्षी नेताओं की बैठक बुलाई जाएगी
रमेश ने यह भी कहा कि इस सत्र को लेकर कुछ दिनों बाद कांग्रेस नेताओं की बैठक और फिर विपक्षी नेताओं की बैठक बुलाई जाएगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया विपक्ष एकजुट है।

