बालाघाटः केंद्र और राज्य सरकार “हर घर जल” का सपना दिखा रही है, आदिवासियों के लिए कई योजनाएं चला रही हैं, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत में आदिवासी क्षेत्रों में आदिवासी परिवार बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं।
जिसकी बानगी बालाघाट जिले के बैहर विकास खंड के ग्राम पंचायत समरिया में देखने को मिली। जहां एक ऐसी तस्वीर सामने आई है,जो सरकारी दावों की पोल खोल रही है। ग्राम पंचायत समरिया के बैगा टोला के आदिवासी बैगा परिवार एक किलोमीटर नदी में झिरिया बनाकर दूषित पानी लाकर पीने को मजबूर हैं, जिससे सरकारी दावों की पोल खुल रही है।

जिले के जनपद पंचायत बैहर के ग्राम पंचायत समरिया क्षेत्र में रहने वाले विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा परिवारों की हालत बद से बदतर हो गई है। कहने को बैगा टोला में एक हैंडपंप तो है, लेकिन वह खराब पड़ा हुआ है। जिसके कारण बैगा टोला में निवासरत बैगा परिवार झिरिया के दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। जिससे उनके स्वास्थ्य पर भी खतरा मंडरा रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि गर्मी में तो कम से कम झिरिया बनाकर पानी पीते हैं, लेकिन बरसात में तो नदी का पानी पीने को मजबूर होना पड़ता है। सरपंच अनिता धुर्वे का कहना है कि ग्राम पंचायत समरिया में हर घर नल योजना की स्वीकृति है, जिसका कार्य विगत 2021 से प्रारंभ हैं लेकिन विभाग की उदासीनता और ठेकेदार की लापरवाही से आज दिनांक तक पूरा नहीं किया गया है। इस संबंध में कई बार जिम्मेदारों को अवगत कराया गया लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
बालाघाट से संवाददाता विशाल महानंद की रिपोर्ट

