उज्जैन जिले में किसानों की फसलों को लगातार नुकसान पहुंचा रही नीलगायों की समस्या से निपटने के लिए वन विभाग ने विशेष अभियान शुरू किया है। पहली बार जिले में दक्षिण अफ्रीका की “बोमा तकनीक” के जरिए नीलगायों को सुरक्षित रूप से पकड़ने की तैयारी की जा रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ा नीलगायों का खतरा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विधानसभा क्षेत्र सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों में नीलगायों के कारण फसलों को भारी नुकसान हो रहा है। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद वन विभाग ने इस समस्या के समाधान के लिए तकनीकी और वैज्ञानिक तरीका अपनाने का निर्णय लिया है।
क्या है बोमा तकनीक ?
वन विभाग के अनुसार इस तकनीक में एक बड़े क्षेत्र में फनल आकार का एनक्लोजर तैयार किया जाता है। इसमें नीलगायों के लिए चारा और पानी की व्यवस्था की जाती है ताकि वे धीरे-धीरे उस स्थान के अभ्यस्त हो जाएं। इसके बाद ग्रामीणों और वन अमले की मदद से हांक कर उन्हें सुरक्षित रूप से एनक्लोजर में पहुंचाया जाएगा।
ड्रोन और विशेषज्ञों की निगरानी में चलेगा अभियान
इस पूरे ऑपरेशन में ड्रोन कैमरों के जरिए लगातार निगरानी रखी जाएगी। साथ ही वन विभाग, स्थानीय ग्रामीण, पुलिस प्रशासन और पशु विशेषज्ञों की टीम भी इस अभियान में शामिल रहेगी। पिछले एक महीने से इसके लिए क्षेत्र का सर्वे किया जा रहा था और उपयुक्त स्थानों का चयन किया गया है।
पहले चरण में 100 नीलगायों को पकड़ने की योजना
वन विभाग के सर्वे के अनुसार क्षेत्र में लगभग एक हजार नीलगायों की मौजूदगी पाई गई है। पहले चरण में करीब 100 नीलगायों को पकड़कर गांधी सागर अभयारण्य में पुनर्वासित करने की योजना बनाई गई है।
प्रदेश में मॉडल के रूप में लागू हो सकता है अभियान
अधिकारियों का कहना है कि यदि उज्जैन में यह प्रयोग सफल रहता है, तो इसे मध्यप्रदेश के अन्य जिलों में भी लागू किया जाएगा। इससे किसानों की फसलों को वन्यजीवों से होने वाले नुकसान को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

