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पीरियड्स के दौरान ब्लड क्लॉट क्यों बनते हैं? बार-बार क्लॉट बनना जानलेवा हो सकता है? जानें ब्लड क्लॉट कम करने के उपाय

पीरियड्स के दौरान ब्लड क्लॉट क्यों बनते हैं? बार-बार क्लॉट बनना जानलेवा हो सकता है? जानें ब्लड क्लॉट कम करने के उपाय

पीरियड्स के बाद सभी महिलाओं को शारीरिक और मानसिक परेशानी होती है। पीरियड्स के दौरान छोटे-छोटे ब्लड क्लॉट बनना एक बहुत आम समस्या है। ये क्लॉट यूट्रस की लाइनिंग के निकलने पर ब्लड, टिशू और प्रोटीन से बनते हैं।

लेकिन बार-बार बड़े क्लॉट बनना, बहुत ज़्यादा ब्लीडिंग होना, बहुत ज़्यादा दर्द होना या 7 दिनों से ज़्यादा पीरियड्स का चलना, इन्हें नज़रअंदाज़ किए बिना समय पर इलाज करवाना ज़रूरी है। काम की भागदौड़ में महिलाएं अपने शरीर पर ठीक से ध्यान नहीं देतीं। बार-बार नज़रअंदाज़ करने से शरीर से जुड़ी बीमारियाँ बड़ी और गंभीर हो जाती हैं और उनकी पूरी सेहत को नुकसान पहुँचाती हैं।

यूट्रस फाइब्रॉएड, एंडोमेट्रियोसिस, हार्मोनल इम्बैलेंस या दूसरी बीमारियों की वजह से पीरियड्स के दौरान ब्लड क्लॉट बनने की संभावना ज़्यादा होती है। पीरियड्स के दौरान यूट्रस की अंदरूनी लाइनिंग निकल जाती है। लेकिन शरीर से ज़्यादा ब्लीडिंग को रोकने के लिए शरीर प्रो-कोएगुलेंट्स नाम का एक फैक्टर बनाता है, जिससे पीरियड्स का ब्लड आसानी से निकल जाता है। आज हम आपको बताएंगे कि पीरियड्स के दौरान ब्लड क्लॉट क्यों बनते हैं? ब्लड क्लॉट कम करने के लिए क्या उपाय करने चाहिए? हम आपको इसके बारे में डिटेल में बताएंगे। अगर आप इन उपायों को अपनाएँगी, तो आपको पीरियड्स के दौरान कोई परेशानी नहीं होगी।

पीरियड्स के दौरान खून के थक्के बनना एक बहुत ही आम समस्या है। लेकिन अगर आपको पीरियड्स के दौरान खून के थक्के बनते हैं, तो यह कोई लक्षण नहीं है। अगर आपको यूटेराइन फाइब्रॉएड, यूटेराइन लाइनिंग से जुड़ी पुरानी बीमारियाँ, हार्मोनल इम्बैलेंस, थायरॉइड डिसऑर्डर, ब्लीडिंग डिसऑर्डर, एनीमिया या कोई रेयर बीमारी है, तो खून के थक्के बनने की संभावना होती है। प्रेग्नेंसी की कॉम्प्लीकेशंस महिलाओं की हेल्थ के लिए खतरा पैदा करती हैं।

हेल्दी पीरियड्स साइकिल के लिए लाइफस्टाइल:
ज़्यादा ब्लीडिंग से शरीर में खून की कमी को रोकने के लिए हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ, अनाज, दालें, ड्राई फ्रूट्स और प्रोटीन शामिल करने चाहिए। इसके अलावा, शरीर में पानी का बैलेंस बनाए रखने के लिए खूब पानी पिएं। साथ ही, अपने शरीर के वज़न को कंट्रोल में रखने के लिए न्यूट्रिएंट्स का सेवन करें। रोज़ाना हल्की फिजिकल एक्सरसाइज़ या योग करें। फिजिकल एक्टिविटी खाए गए खाने को ठीक से पचाने में मदद करती है। अगर आप थायरॉइड, PCOS या एनीमिया जैसी किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं, तो आपको डॉक्टर की सलाह से सही इलाज करवाना चाहिए।

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Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Rochak Khabare Hindi