कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए शुक्रवार का दिन ऐतिहासिक बन गया। भारतीय जूडो खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए महज 30 मिनट के भीतर दो स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिए। अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने अपने-अपने वर्ग में गोल्ड जीतकर भारतीय जूडो को नई पहचान दिलाई।
वहीं यामिनी मौर्य ने भी फाइनल में जगह बनाकर भारत के लिए एक और पदक पक्का कर दिया है।
अस्मिता डे ने खत्म किया 36 साल का इंतजार
महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में अस्मिता डे ने कनाडा की हेडी क्वाच को रोमांचक मुकाबले में हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसके साथ ही वह कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो का गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बन गईं। जूडो को 1990 में कॉमनवेल्थ गेम्स की पदक स्पर्धा में शामिल किया गया था, लेकिन तब से भारत को इस स्पर्धा में स्वर्ण पदक का इंतजार था, जिसे अस्मिता ने आखिरकार खत्म कर दिया।
शानदार वापसी से जीता गोल्ड
फाइनल मुकाबले की शुरुआत अस्मिता के लिए आसान नहीं रही। शुरुआती दौर में वह पिछड़ गई थीं और उन पर पेनल्टी भी लगी। इसके बावजूद उन्होंने शानदार वापसी की और मुकाबले को गोल्डन स्कोर तक पहुंचाया। निर्णायक क्षण में बेहतरीन तकनीक का प्रदर्शन करते हुए उन्होंने जीत दर्ज कर भारत को ऐतिहासिक स्वर्ण पदक दिलाया।
30 मिनट बाद हर्ष सिंह ने भी रच दिया इतिहास
अस्मिता की जीत के करीब आधे घंटे बाद पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में हर्ष सिंह ने ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ कैट्ज़ को हराकर गोल्ड मेडल जीत लिया। वह कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में जूडो में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष खिलाड़ी बन गए। पूरे मुकाबले में उन्होंने धैर्य और शानदार रणनीति का परिचय दिया और अंतिम क्षणों में निर्णायक बढ़त हासिल कर जीत दर्ज की।
यामिनी मौर्य से भी स्वर्ण की उम्मीद
भारत की एक और जूडो खिलाड़ी यामिनी मौर्य ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने वर्ग के फाइनल में जगह बनाई है। फाइनल में पहुंचने के साथ ही उनके नाम कम से कम रजत पदक सुनिश्चित हो गया है। अब भारतीय प्रशंसकों की नजर उनके खिताबी मुकाबले पर होगी, जहां वह देश के लिए एक और स्वर्ण पदक जीतने की कोशिश करेंगी।
साधारण परिवार से निकलकर बनीं देश की नई स्टार
त्रिपुरा के दक्षिण त्रिपुरा जिले की रहने वाली अस्मिता डे का सफर संघर्ष और मेहनत से भरा रहा है। उनके पिता साइकिल मैकेनिक थे और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने जूडो में अपना करियर बनाया। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार शानदार प्रदर्शन के बाद अब उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण जीतकर भारतीय खेल इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया है।
भारतीय जूडो के लिए यादगार दिन
एक ही दिन में दो स्वर्ण पदक जीतना भारतीय जूडो के इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना जा रहा है। अस्मिता डे और हर्ष सिंह की शानदार सफलता ने यह साबित कर दिया कि भारतीय खिलाड़ी अब वैश्विक मंच पर किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

