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धमकी से डरने वाला नहीं: अंसारी...बाबरी मस्जिद के मुद्दई ने न्याय पालिका पर जताई पूर्ण आस्था

अयोध्या। न्याय पालिका पर पूर्ण आस्था जताते हुए बाबरी मस्जिद मुद्दई इकबाल अंसारी ने गुरूवार को कहा कि वह सच्चे हिन्दुस्तानी हैं और जान से मारने की मिल रही धमकी उन्हें नहीं डरा सकती। बाबरी विध्वंस की 26वीं वर्षगांठ पर श्री अंसारी ने कहा कि मुझे एक पत्र के जरिये जान से मारने की धमकी दी गई है, जिसकी मौखिक सूचना मैंने श्रीरामजन्मभूमि थाना को दे दी है। इस तरह की धमकियों से मैं डरने वाला नहीं हूँ, क्योंकि कानून और अदालत पर पूरा भरोसा है। उच्चतम न्यायालय में चल रहे बाबरी मस्जिद, रामजन्मभूमि मुकदमे में पक्षकार इकबाल अंसारी को पत्र भेजने वाले ने न सिर्फ मुकदमा वापस लेने की धमकी दी है, बल्कि बाबरी मस्जिद की वकालत कर रहे अधिवक्ता जफरयाब जिलानी के नाम का जिक्र भी किया गया है। टूटी-फूटी हिंदी भाषा में लिखे पत्र में अंसारी को धमकी दी गई है कि मुकदमा वापस नहीं लिया तो जान से मार दिया जायेगा। दिलचस्प बात यह है कि आखिर में पत्र भेजने वाले का नाम लालू यादव, राष्ट्रीय अध्यक्ष राजद लिखा है। पत्र के बाहरी हिस्से में टूटी-फूटी राइटिंग में रमश्रय राय अधिवक्ता कोर्ट समस्तीपुर, बिहार लिखा है। श्री अंसारी ने बताया कि पत्र में दो-तीन पता होने के नाते लिखित तौर पर थाना श्रीरामजन्मभूमि में एफआईआर दर्ज नहीं कराया है, लेकिन मौखिक सूचना पुलिस को दे दी है।

उन्होंने बताया कि खाकी रंग के लिफाफे में दो पन्नों के इस पत्र में लिखा है कि रामजन्मभूमि रामलला की और हिन्दुओं की है। मुसलमानों ने बेवजह मुकदमा कर जालसाजी, फरेब और धोखाधड़ी किया है और साधू-संतों को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पत्र में यह भी लिखा है कि अयोध्या के मुसलमानों को अगर जिंदा रहना है, तो उन्हें अपना दावा छोड़ देना चाहिए। दो पन्ने के इस पत्र में कई आपत्तिजनक बातें लिखी हैं और बाबरी मस्जिद की पैरवी करने वालों के साथ ऐसा करने की धमकी दी गयी है।

बाबरी मुद्दई ने बताया कि इससे पूर्व में भी उन्हें पत्र द्वारा जान से मारने की धमकी दी जा रही है, लेकिन उन्हें देश के कानून और कोर्ट पर पूरा भरोसा है। ऐसी धमकियों से डरने वाले हम नहीं हैं। उन्होंने कहा कि हम इंसाफ की लड़ाई लड़ रहे हैं और जब तक अदालत इसका फैसला सुना नहीं देती तब तक हम लड़ते रहेंगे। उन्होंने कहा कि मंदिर-मस्जिद का विवाद देश के सर्वोच्च न्यायालय में है, जो भी न्यायालय फैसला करेगा देश के सभी मुस्लिम समाज उसका स्वागत करेंगे।

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