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एएन झा इलाहाबाद विश्वविद्यालय की थाती हैं: कुलपति

एएन झा इलाहाबाद विश्वविद्यालय की थाती हैं: कुलपति

प्रयागराज। एएन. झा शानदार व्यक्तित्व के धनी थे और वे विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक थाती हैं। इलाहाबाद विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव ने मंगलवार को 'माया द एम्मार्टल रोमांस' पुस्तक चर्चा में यह बात कही। पुस्तक के लेखक तेजकर झा हैं।

यह पुस्तक एएन. झा की स्मृतियों की दास्तान है। पुस्तक को उनकी डायरियों के आधार पर लिखा गया है। इसके विमोचन कार्यक्रम में कुलपति प्रो. श्रीवास्तव अपनी बात रख रही थीं।

उन्होंने कहा कि एएन. झा की उपलब्धियां इस बात से इंगित हो जाती हैं कि उनका चित्र यूपीएससी के चेयरमैन कक्ष में लगा हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रोफेसर एंड झा की उपलब्धियों पर विश्वविद्यालय को गर्व है।

एन झा छात्रावास स्थित उनके बस्ट को और उनकी रचित किताबों को उचित स्थान पर रखा जाएगा, ताकि विश्वविद्यालय आने वाले लोगों को उनके महान कृतित्व और व्यक्तित्व के बारे में पता चल सके।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कला संकाय के अधिष्ठाता हेरम्ब चतुर्वेदी ने प्रयाग स्ट्रीट का संदर्भ उठाते हुए एएन. झा के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इलाहाबाद में म्युनिसिपल बोर्ड के वाइस चेयरमैन भी एएन झा को अप्वॉइंट किया गया था। उस समय हुए जल संकट पर उन्होंने जिस तरह गवर्नर की जल सप्लाई रोकने का निर्णय लिया था, वह ऐतिहासिक रूप से मील का पत्थर था।

पुस्तक के लेखक तेजकर झा ने "आइडिया बिहाइंड द बुक" के बारे में विस्तार से चर्चा की। एएन. झा की डायरियों के बहाने उनके अतीत को सबके सामने लाने के प्रयास पर चर्चा की।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए हिंदी विभाग इविवि के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राजेश कुमार गर्ग ने कहा कि बसंत के अवसर पर एएन झा की मधुर स्मृतियों पर आधारित इस पुस्तक का विमोचन "यात्रा पर निकलती रही है बुद्धि पर हृदय को साथ लेकर" वाले भाव को पुष्ट करती है।

धन्यवाद ज्ञापन डीन रिसर्च एंड डेवलपमेंट इविवि प्रोफेसर एस.आई रिजवी ने किया। अतिथियों का स्वागत विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो.नरेंद्र शुक्ला ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के वित्त अधिकारी डॉ. सुनील कान्त मिश्र सहित अधिष्ठाता विज्ञान संकाय प्रो. शेखर श्रीवास्तव, चीफ प्रॉक्टर प्रो. हर्ष कुमार, डीन कालेज डेवलपमेंट प्रो. पंकज कुमार तथा अनेक विभागों के अध्यक्ष और विश्वविद्यालय के आचार्यगण तथा लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद थे।

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