प्रयागराज। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि उच्चतम न्यायालय ने सुशील कुमार सिंघल केस में साफ कहा है कि कर्मचारी की सेवानिवृत्ति से दस साल पहले गलत वेतन निर्धारण का पेंशन पर असर नहीं पड़ेगा।
इस आदेश का उल्लंघन कर लगातार पारित आदेश के खिलाफ याचिकाएं दाखिल हो रही है।
कोर्ट ने कहा ऐसे आदेश न केवल अवैध है अपितु अदालत की अवमाननाकारी भी है। कोर्ट ने पुलिस मुख्यालय प्रयागराज के डीसीपी व प्रमुख सचिव गृह उप्र लखनऊ से अलग-अलग हलफनामा दाखिल कर स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि किन परिस्थितियों के कारण सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना कर ऐसे आदेश लगातार पारित किए जा रहे हैं। याचिका की अगली सुनवाई 09 अप्रैल को होगी।
यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने राजबहादुर सिंह की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है। याची का कहना है कि उसकी पेंशन में 28 जून 25 के डी सी पी के आदेश से अवैध कटौती की गई है। यह कटौती 16 जनवरी 2007 के शासनादेश व सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विपरीत की गई है। कोर्ट ने कहा कानूनी स्थिति सुप्रीम कोर्ट ने तय कर दी है। फिर भी ऐसे आदेश हो रहे। कोर्ट ने दोनों अधिकारियों से सफाई मांगी है।

