हापुड। आज के आधुनिक दौर में जहां कई लोग अपने बुजुर्ग माता-पिता से दूरी बना लेते हैं, वहीं एक बेटे और बहू ने मां की सेवा और सम्मान की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी हर तरफ सराहना हो रही है।
बेटे ने अपनी बुजुर्ग मां को तीर्थ यात्रा कराने का संकल्प लिया और उसे पूरा करने के लिए मां को कांवड़ में बैठाकर पवित्र गंगाजल लेने निकल पड़ा।
गढ़मुक्तेश्वर के बृजघाट गंगा घाट से शुरू हुई यह अनोखी कांवड़ यात्रा लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। बेटे सत्येंद्र सिंह ने अपनी मां को कांवड़ में बैठाया है। कांवड़ के एक ओर करीब 45 किलो गंगाजल रखा है, जबकि दूसरी ओर उनकी मां विराजमान हैं। सत्येंद्र अपनी पत्नी के साथ इस धार्मिक यात्रा पर आगे बढ़ रहे हैं।
सत्येंद्र सिंह ने बताया कि उन्होंने अपनी मां को तीर्थ यात्रा कराने के लिए यह संकल्प लिया था। उन्होंने कहा कि गढ़मुक्तेश्वर के बृजघाट से वह कांवड़ लेकर चले हैं, जिसमें एक तरफ गंगाजल है और दूसरी तरफ उनकी मां हैं। उनका लक्ष्य अलीगढ़ जनपद के गांव जठरी पहुंचकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करना है।
उन्होंने कहा कि यह संकल्प उन्होंने भगवान भोलेनाथ की कृपा से लिया था और अब उसी आशीर्वाद से इसे पूरा करने के लिए आगे बढ़ रहे हैं। मां की सेवा और उनकी इच्छा पूरी करना ही उनके जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य है।
रास्ते से गुजर रहे लोग जब इस अनोखे दृश्य को देख रहे हैं तो भावुक हुए बिना नहीं रह पा रहे हैं। लोग सत्येंद्र और उनकी पत्नी की जमकर प्रशंसा कर रहे हैं और उन्हें आधुनिक युग का श्रवण कुमार बता रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि माता-पिता की सेवा से बढ़कर कोई धर्म नहीं है। जिस उम्र में कई बुजुर्गों को अपनों के सहारे की जरूरत होती है, उस समय सत्येंद्र ने अपनी मां को सम्मान और प्रेम देते हुए समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है।
यह कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि माता-पिता के प्रति प्रेम, जिम्मेदारी और सेवा भाव का भी संदेश दे रही है। सत्येंद्र और उनकी पत्नी के इस समर्पण को देखकर हर कोई उनके जज्बे को सलाम कर रहा है।

