शामली। प्राकृतिक खेती और टिकाऊ कृषि मॉडल को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में शामली के नागल स्थित भूमि नेचुरल फूड फॉरेस्ट ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। मंगलवार को जर्मनी के संघीय कृषि, खाद्य एवं क्षेत्रीय पहचान मंत्रालय (BMLEH) के प्रतिनिधिमंडल ने फार्म का दौरा कर प्राकृतिक खेती, फूड फॉरेस्ट प्रणाली और पुनर्योजी (रेजेनरेटिव) कृषि मॉडल का विस्तृत अध्ययन किया।
प्रतिनिधिमंडल में जर्मनी के संघीय कृषि, खाद्य एवं क्षेत्रीय पहचान मंत्रालय के प्रतिनिधि थॉमस जेबुन्के, GFA Consulting Group की प्रतिनिधि सब्रीना लैंडमैन तथा ऑर्गेनिक फार्मिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया (OFAI) के प्रतिनिधि रोहित जैन शामिल रहे। प्रतिनिधियों ने पूरे दिन फार्म पर रहकर खेती की विभिन्न प्रणालियों का अवलोकन किया और विशेषज्ञों से विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
फार्म संचालक श्याम सिंह रोड और अभय रोड ने प्रतिनिधिमंडल को बताया कि भूमि नेचुरल फूड फॉरेस्ट में बिना रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से खेती की जाती है। यहां बहुस्तरीय फूड फॉरेस्ट मॉडल के तहत फलदार वृक्षों, मौसमी सब्जियों, औषधीय पौधों, मसालों, फूलों और जैव विविधता को बढ़ावा देने वाले अनेक पौधों का संरक्षण और उत्पादन किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि यह मॉडल केवल खाद्य उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने, जल संरक्षण, जैव विविधता के संवर्धन और पर्यावरण संतुलन को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। फूड फॉरेस्ट प्रणाली प्रकृति के जंगलों से प्रेरित है, जिसमें अलग-अलग ऊंचाई और परतों पर विभिन्न प्रकार की फसलें एक साथ उगाई जाती हैं। इससे कम संसाधनों में अधिक उत्पादन, पानी की बचत और किसानों की आय बढ़ाने की संभावनाएं भी बढ़ती हैं।
दौरे के दौरान भारत और जर्मनी के बीच प्राकृतिक एवं जैविक खेती, सुरक्षित खाद्य उत्पादन तथा कृषि उत्पादों के आयात-निर्यात को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। प्रतिनिधिमंडल ने यह समझने का प्रयास किया कि भारत में विकसित प्राकृतिक खेती और फूड फॉरेस्ट मॉडल भविष्य में दोनों देशों के बीच कृषि सहयोग और व्यापार को किस प्रकार नई दिशा दे सकते हैं।
विदेशी प्रतिनिधियों ने भूमि नेचुरल फूड फॉरेस्ट में विकसित कृषि प्रणालियों, पौधों की विविधता, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और खेती में अपनाए गए नवाचारों का गहन अवलोकन किया। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए इसे पर्यावरण संरक्षण, स्वस्थ खाद्य उत्पादन और टिकाऊ कृषि के क्षेत्र में प्रेरणादायक मॉडल बताया।
कार्यक्रम के समापन पर सभी अतिथियों ने परिसर में लीची का पौधा लगाकर हरित भविष्य और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इसके बाद उन्होंने भूमि नेचुरल में प्राकृतिक रूप से उगाई गई उपज से तैयार पारंपरिक एवं पौष्टिक भोजन का स्वाद लिया और उसकी गुणवत्ता की प्रशंसा की।
भूमि नेचुरल फूड फॉरेस्ट का उद्देश्य प्राकृतिक खेती, फूड फॉरेस्ट और पुनर्योजी कृषि के माध्यम से किसानों को टिकाऊ, लाभकारी और पर्यावरण-अनुकूल कृषि मॉडल उपलब्ध कराना है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय दौरे भारत की प्राकृतिक खेती को वैश्विक पहचान दिलाने के साथ-साथ कृषि क्षेत्र में नए सहयोग और निवेश के अवसर भी बढ़ाएंगे।

