मुजफ्फरनगर। सावन माह में चल रही कांवड़ यात्रा के दौरान जहां शिवभक्तों की आस्था अपने चरम पर दिखाई दे रही है, वहीं कई कांवड़ यात्राएं सामाजिक संदेशों के कारण भी लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं।
हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर लौट रहे बुलंदशहर के शिवभक्तों की एक टोली अपनी अनूठी "मोदी-योगी" नाम की कांवड़ और गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने की मांग को लेकर चर्चा का विषय बनी हुई है। इस टोली की खास बात यह भी है कि इसमें दिल्ली निवासी मुस्लिम युवक समीर भी पहली बार कांवड़ यात्रा में शामिल हुआ है। उसने कहा कि वह सभी धर्मों का सम्मान करता है और हिंदू तथा मुस्लिम दोनों परंपराओं को समान श्रद्धा से मानता है।
बुलंदशहर निवासी शिवभक्त नीरज ने बताया कि उनकी पांच सदस्यों की टोली हरिद्वार से गंगाजल लेकर आई है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में भी उनकी टोली विशेष कांवड़ लेकर आई थी और इस बार भी उन्होंने अपनी आस्था के प्रतीक के रूप में "मोदी-योगी" नाम की कांवड़ तैयार कराई है। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में देश और प्रदेश में अच्छे कार्य हो रहे हैं। उन्होंने गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिए जाने की मांग करते हुए कहा कि यही उनकी प्रमुख इच्छा और संकल्प है।
नीरज ने कहा कि उन्होंने गंगा मैया और भगवान भोलेनाथ से प्रार्थना की है कि वर्ष 2027 में योगी आदित्यनाथ एक बार फिर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनें और वर्ष 2029 में नरेंद्र मोदी दोबारा देश के प्रधानमंत्री बनें। उन्होंने कहा कि उनकी सबसे बड़ी कामना गौ माता को राष्ट्रमाता का सम्मान दिलाने की है। साथ ही उन्होंने उत्तराखंड में कांवड़ यात्रा के दौरान पुलिस के व्यवहार को लेकर भी नाराजगी जताते हुए कहा कि कुछ स्थानों पर श्रद्धालुओं के साथ सख्ती की शिकायतें सामने आई हैं।
उन्होंने बताया कि उनकी टोली में दिल्ली निवासी मुस्लिम युवक समीर भी शामिल है। समीर के परिवार और बुलंदशहर के उनके परिचितों के बीच लंबे समय से पारिवारिक संबंध हैं। जब समीर से कांवड़ यात्रा में शामिल होने के बारे में पूछा गया तो उसने कहा कि उसके लिए सभी धर्म समान हैं और यदि उसके साथी कांवड़ यात्रा पर जा रहे हैं तो वह भी पूरी श्रद्धा के साथ इसमें शामिल होगा।
मुस्लिम युवक समीर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वह पहली बार कांवड़ लेकर आया है और भगवान भोलेनाथ से अपनी मनोकामना लेकर यात्रा कर रहा है। उसने कहा कि वह चाहता है कि गौ माता को राष्ट्रमाता का सम्मान मिले। समीर ने बताया कि उसका पालन-पोषण ऐसे माहौल में हुआ है जहां हिंदू और मुस्लिम दोनों धर्मों का सम्मान करना सिखाया गया। उसके पिता के लापता होने के बाद जिन लोगों ने उसे सहारा दिया, वे हिंदू परिवार से थे। इसी कारण वह दोनों धर्मों को समान सम्मान देता है और दोनों की परंपराओं का आदर करता है।
समीर ने कहा कि वह मुस्लिम धर्म का पालन भी करता है और हिंदू धर्म की परंपराओं का भी सम्मान करता है। उसके अनुसार धर्म लोगों को जोड़ने का माध्यम होना चाहिए, बांटने का नहीं। पहली बार कांवड़ यात्रा में शामिल होकर उसे आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त हुआ है और उसने भगवान भोलेनाथ से अपनी मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना की है।
कांवड़ यात्रा के दौरान यह टोली जहां अपनी विशेष कांवड़ और गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने की मांग को लेकर लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है, वहीं मुस्लिम युवक समीर की भागीदारी भी सामाजिक सौहार्द, आपसी भाईचारे और धार्मिक सम्मान का संदेश देती नजर आई। यात्रियों का कहना है कि आस्था का सबसे बड़ा संदेश एक-दूसरे के धर्म और विश्वास का सम्मान करना है और यही भारत की साझा संस्कृति की पहचान भी है।

