मुजफ्फरनगर। शहर के राजकीय संप्रेक्षण गृह (किशोर) में गुरुवार को उस समय हलचल बढ़ गई जब न्यायिक अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय टीम ने औचक निरीक्षण कर संस्था की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
अधिकारियों ने न केवल कागजी खानापूर्ति देखी, बल्कि वहां रह रहे किशोरों के बीच बैठकर उनकी रोजमर्रा की समस्याओं और उन्हें मिल रही सुविधाओं की हकीकत जानी।
न्यायिक टीम ने परखा एक-एक रिकॉर्ड
निरीक्षण के दौरान अपर जिला जज ज्योत्सना शिवांच, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव डॉ. सत्येंद्र कुमार चौधरी, न्यायिक मजिस्ट्रेट अनिष्का चौधरी और एडिशनल सिविल जज (सीनियर डिवीजन) सोनम गुप्ता ने संयुक्त रूप से संस्था का भ्रमण किया। अधिकारियों ने किशोरों की केस फाइलों के साथ-साथ कार्यालय के महत्वपूर्ण रिकॉर्ड की गहनता से जांच की।
किशोरों से पूछा- 'खाना कैसा मिलता है?'
निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य किशोरों के मानवाधिकारों और उनकी बुनियादी जरूरतों की उपलब्धता सुनिश्चित करना था। टीम ने हर किशोर से अलग-अलग बात की और उनसे निम्नलिखित बिंदुओं पर जानकारी ली।
भोजन और स्वास्थ्य: मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता और नियमित स्वास्थ्य जांच।
शिक्षा और कौशल: संस्था में दी जा रही शिक्षा और खेलकूद की गतिविधियों का स्तर।
मनोवैज्ञानिक परामर्श: जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. अर्पण जैन की उपस्थिति में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी चर्चा हुई।
बेहतर भविष्य के लिए दिए कड़े निर्देश
निरीक्षण के अंत में अधिकारियों ने संस्था प्रभारी मोहित कुमार को आवश्यक सुधार के निर्देश दिए। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि संप्रेक्षण गृह का उद्देश्य केवल किशोरों को रखना नहीं, बल्कि उन्हें सुधार कर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। इसके लिए बच्चों की पढ़ाई और उनके उज्ज्वल भविष्य पर विशेष ध्यान देने की हिदायत दी गई। इस दौरान सहायक अध्यापक राकेश कुमार, कर्मचारी नीरज कुमार, सफाई कर्मचारी सुरजीत कुमार और सुरक्षा बल के जवान मुस्तैद रहे। अधिकारियों ने साफ-सफाई और सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने के निर्देश दिए।

