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मुजफ्फरनगरः 23 साल बाद मिला न्याय, अपहरण व हत्या से जुड़े मामले में अदालत का सख्त फैसला, तीन अभियुक्तों को 3-3 साल की कैद व जुर्माना

मुजफ्फरनगरः 23 साल बाद मिला न्याय, अपहरण व हत्या से जुड़े मामले में अदालत का सख्त फैसला, तीन अभियुक्तों को 3-3 साल की कैद व जुर्माना

मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश पुलिस के महत्वाकांक्षी अभियान के तहत एक बार फिर न्याय की मजबूत मिसाल देखने को मिली है। करीब 23 वर्ष पुराने चर्चित अपहरण व हत्या प्रकरण में मुजफ्फरनगर पुलिस, मॉनिटरिंग सेल और अभियोजन की प्रभावी पैरवी के चलते अदालत ने तीन अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा के कुशल नेतृत्व तथा पुलिस अधीक्षक अपराध श्रीमती इन्दु सिद्धार्थ के निकट पर्यवेक्षण में इस मामले की लगातार मॉनिटरिंग की गई, जिसका परिणाम यह रहा कि वर्षों से लंबित यह मुकदमा निर्णायक मोड़ तक पहुंच सका।

अदालत का फैसला:
माननीय एडीजे-05/विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट) श्री काशिफ शेख की अदालत ने थाना सिविल लाइन में दर्ज मु0अ0सं0-506/2003 धारा 3(1) गैंगस्टर एक्ट के तहत
तीनों दोषियों को 3-3 वर्ष के कठोर कारावास
प्रत्येक पर ₹5000 का अर्थदंड
से दंडित किया।
दोषी करार दिए गए अभियुक्त:
भूषण पुत्र चतरु, निवासी फिरोजपुर, थाना भोपा
जोगेंद्र पुत्र राजपाल, निवासी चिंदौड़ी, थाना दौराला (मेरठ)
कालू पुत्र सरदार अली, निवासी जौली, थाना भोपा
क्या था पूरा मामला?
यह मामला वर्ष 2003 का है, जब थाना सिविल लाइंस क्षेत्र के निवासी जमील अहमद ने अपने भाई नसीम के अपहरण और हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
21 जुलाई 2003 की शाम करीब 6 बजे नसीम साइकिल लेकर घर से निकले थे, लेकिन वापस नहीं लौटे। काफी तलाश के बाद भी कोई सुराग न मिलने पर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।
जांच के दौरान जाकिर, कुंवरपाल, भूषण, जोगेंद्र और कालू के नाम सामने आए, जिन पर अपहरण व हत्या का आरोप सिद्ध हुआ और उन्हें सजा भी मिली। इसी आधार पर तत्कालीन थाना अध्यक्ष द्वारा 14 सितंबर 2003 को सभी के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी मुकदमा दर्ज किया गया था।

मजबूत पैरवी बनी सफलता की कुंजी
इस केस में विशेष लोक अभियोजक दिनेश सिंह पुंडीर और राजेश कुमार शर्मा ने सशक्त ढंग से न्यायालय में पक्ष रखा। वहीं थाना सिविल लाइंस की ओर से पैरोकार बबली की सक्रिय भूमिका रही, जिससे केस को मजबूती मिली।
यह फैसला न केवल पीड़ित परिवार के लिए न्याय की किरण लेकर आया है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कानून के हाथ लंबे होते हैं और अपराधी चाहे कितने भी समय तक बचने की कोशिश करें, अंततः न्याय की पकड़ से बच नहीं सकते।
ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत मुजफ्फरनगर पुलिस की यह सफलता जिले में कानून व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

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