प्रयागराज/लखनऊ। उत्तर प्रदेश में जानलेवा चाइनीज मांझे से लगातार हो रहे हादसों और मौतों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि पूरे प्रदेश में इस प्रतिबंधित मांझे के उत्पादन, भंडारण और बिक्री को पूरी तरह समाप्त करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।
आदेश के बावजूद हादसे क्यों?
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए गहरी चिंता व्यक्त की। अदालत ने कहा कि पूर्व में पाबंदी के आदेश जारी होने के बावजूद जमीनी स्तर पर चाइनीज मांझा धड़ल्ले से बिक रहा है और मासूमों की जान जा रही है। कोर्ट ने इसे प्रशासन की बड़ी लापरवाही करार दिया।
लापरवाह अधिकारियों पर भी गिरेगी गाज
हाईकोर्ट ने इस बार जवाबदेही का दायरा बढ़ा दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल मांझा बेचने या बनाने वाले ही दोषी नहीं होंगे। जिस क्षेत्र में बिक्री पाई जाएगी, वहां के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। सरकार को एक ऐसी प्रभावी कार्य योजना बनाने का निर्देश दिया गया है जिससे इस जानलेवा डोर की सप्लाई चेन को जड़ से खत्म किया जा सके।
मुआवजा और इलाज पर विचार करने के निर्देश
अदालत ने सरकार को मानवीय पहलू पर भी गौर करने को कहा है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि सरकार उन पीड़ितों को मुआवजा और समुचित इलाज उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर विचार करे, जो इस जानलेवा मांझे के कारण अपंग हुए हैं या जिनके परिजनों की मृत्यु हुई है।
क्या है अगला कदम?
राज्य सरकार को अब इस मामले में की गई कार्रवाई की प्रगति रिपोर्ट पेश करनी होगी। हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 11 मई की तिथि निर्धारित की है। प्रशासन को तब तक पूरे प्रदेश में सघन छापेमारी कर रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।

