कुछ ही देर में ड्राइवर उसकी लोकेशन पर पहुंच गया। ड्राइवर ने देखा कि लड़की बेहद नशे में थी। वह ठीक से चल भी नहीं पा रही थी और किसी तरह कैब तक पहुंची।
ड्राइवर ने उसे संभालकर गाड़ी में बैठाया और घर का पता कन्फर्म किया।
कैब चल पड़ी, लेकिन लड़की की हालत ऐसी थी कि उसे खुद भी ठीक से अंदाजा नहीं था कि वह कहां जा रही है और उसके आसपास क्या हो रहा है। वह पूरी तरह नशे में थी।
ड्राइवर की नजर उसके सामान पर पड़ी तो उसने देखा कि लड़की के पास दो मोबाइल फोन थे और गले में सोने की चेन भी थी।
ऐसी हालत में अगर रास्ते में लड़की का कोई सामान गिर जाता या वह घर पहुंचने के बाद अपना फोन अथवा चेन नहीं ढूंढ पाती, तो शक सबसे पहले ड्राइवर पर ही जा सकता था।
लेकिन ड्राइवर ने इस स्थिति का फायदा उठाने के बजाय जिम्मेदारी दिखाई।
उसने लड़की को सुरक्षित तरीके से उसके बताए पते तक पहुंचाया और उसे घर पर छोड़ दिया।
सबसे बड़ी बात यह थी कि लड़की उस समय अपने होश में नहीं थी। ऐसे समय में किसी कमजोर या असहाय व्यक्ति की मदद करना ही असली इंसानियत है।
ड्राइवर चाहता तो रास्ते में गलत फायदा उठाने की कोशिश कर सकता था, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। उसने न लड़की के सामान को हाथ लगाया और न उसकी मजबूरी का फायदा उठाया।
आज जब अक्सर छोटी-छोटी घटनाओं के कारण लोगों का भरोसा टूटता दिखाई देता है, ऐसे मामलों में किसी व्यक्ति की ईमानदारी और जिम्मेदारी सामने आती है तो उसे पहचानना भी जरूरी है।
यह कहानी सिर्फ एक ओला ड्राइवर की नहीं, बल्कि उस भरोसे की है जो एक अनजान इंसान दूसरे अनजान इंसान पर करता है।
नशे में होने की वजह से लड़की खुद अपनी सुरक्षा को लेकर सतर्क नहीं थी, लेकिन ड्राइवर ने अपनी जिम्मेदारी समझी और उसे सुरक्षित घर तक पहुंचाया।
ऐसी इंसानियत और ईमानदारी को सलाम।

