उन्होंने बड़ी दूर की कौड़ी लाते हुए सीधे पति के लंगोटिया यार पर ही अपनी तीछी नजरों का 'वाई-फाई' कनेक्ट कर दिया।
थोड़ी सी नैन-मटक्का की बत्ती जलाई, दो-चार कातिलाना मुस्कान फेंकी और पति का बेचारा सीधा-साधा दोस्त भी इस 'भाभी ट्रैप' में बिना किसी हेलमेट के जा गिरा!
भाभी जी ने ज़रा भी देर न करते हुए घर में रखा सारा सोना-चांदी, गहने और गाढ़ी कमाई का कैश झोले में समेटा और पति को 'टा-टा बाय-बाय' बोलकर दोस्त के साथ रफूचक्कर हो गईं।

दोनों भागकर पहुँचे उत्तर प्रदेश। वहाँ पूरे 2 महीने तक ऐसा तूफानी रोमांस और ऐश-ओ-आराम चला कि मानो ज़माने की सारी खुशियाँ इन्हीं के नाम हो गई हों! भा
भी जी का पूरा पैसा और गहने बेच-बेचकर दोनों ने खूब 'एंजॉय' किया। लेकिन जैसे ही 2 महीने बाद झोले से आखिरी नोट खत्म हुआ और जेवर का डिब्बा खाली हुआ, दोस्त का 'रोमांटिक भूत' एक झटके में उतर गया!
दोस्त ने सोचा- "जब तक माल था, तब तक ताल था!" और मौका देखते ही भाभी जी को वहीं अकेले छोड़कर ऐसा नौ-दो-ग्यारह हुआ कि उसका आज तक पता नहीं चला।
अब मैडम जी मुँह लटकाए पहुँचीं सीधे पुलिस थाने!भाभी जी रो-रोकर बोलीं- "साहब! वो दुष्ट मुझे बहला-फुसलाकर ले गया था! उसने मेरा 2 महीने तक खूब इस्तेमाल किया और मेरा सारा पैसा-गहना लूटकर भाग गया, मुझे न्याय चाहिए!"
अब दरोगा जी भी सोच में पड़ गए कि मैडम... जब घर से तिजोरी समेटकर खुद भाग रही थीं तब कौन सा 'मंत्र' फूँका गया था? 2 महीने तक यूपी में जो रोमांस के झूलों पर पींगे बढ़ाए जा रहे थे,
तब बहलाने-फुसलाने का अहसास क्यों नहीं हुआ? जैसे ही बैंक बैलेंस ज़ीरो हुआ, वैसे ही 'इस्तेमाल' होने का ख्याल आ गया!
सोशल मीडिया की जनता से कड़क सवाल:
- क्या आपको लगता है कि दोस्त को भी 'फ्री 2 मंथ्स ट्रायल' खत्म होने के बाद अब नया 'सब्सक्रिप्शन' नहीं चाहिए था?
- ऐसे मामलों में असली हमदर्दी का हकदार कौन है-बिना कसूर का पति या 2 महीने बाद ज्ञान प्राप्त करने वाली भाभी जी?
अपनी कड़क और मज़ेदार राय नीचे कमेंट बॉक्स में ठोक दो!

