बड़ौत (सच कहूँ/डॉ संदीप कुमार)। Baraut News: विश्व तंबाकू निषेध दिवस केवल एक दिन मनाने का अवसर नहीं, बल्कि अपने स्वास्थ्य के प्रति जिम्मेदारी समझने का संदेश है। आज भी बड़ी संख्या में लोग धूम्रपान, गुटखा, खैनी, जर्दा और अन्य तंबाकू उत्पादों का सेवन कर रहे हैं, जबकि यह आदत धीरे-धीरे शरीर को गंभीर बीमारियों की ओर धकेलती है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि तंबाकू के कारण होने वाले नुकसान का एहसास अक्सर तब होता है, जब बीमारी गंभीर रूप ले चुकी होती है।
मेडिसिटी हॉस्पिटल कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. तरुण तोमर ने कहा कि तंबाकू दुनिया भर में कैंसर के प्रमुख कारणों में से एक है। यह केवल फेफड़ों को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि मुंह, गला, जीभ, भोजन नली, स्वरयंत्र और शरीर के कई अन्य अंगों में कैंसर का खतरा बढ़ा देता है। उन्होंने कहा कि लोग अक्सर यह सोचकर तंबाकू का सेवन करते रहते हैं कि इससे उन्हें कोई नुकसान नहीं होगा, लेकिन यह भ्रम स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक साबित हो सकता है।
डॉ. तोमर ने बताया कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी अचानक नहीं होती। शरीर पहले कई संकेत देता है, लेकिन लोग उन्हें सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। यदि मुंह में कोई छाला लंबे समय तक ठीक न हो, लगातार खांसी बनी रहे, निगलने में परेशानी हो, आवाज में बदलाव आए, शरीर में गांठ महसूस हो या बिना कारण वजन कम होने लगे, तो तुरंत चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए। समय पर पहचान होने पर कैंसर का उपचार अधिक प्रभावी और सफल हो सकता है।
उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में युवाओं के बीच भी तंबाकू का चलन बढ़ रहा है। मित्रों के दबाव, दिखावे या तनाव के कारण शुरू हुई यह आदत धीरे-धीरे लत बन जाती है। यह केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को ही नुकसान नहीं पहुंचाती, बल्कि उसके परिवार की खुशियों और आर्थिक स्थिति पर भी असर डालती है। डॉ. तरुण तोमर का कहना है कि तंबाकू छोड़ने के लिए किसी विशेष दिन का इंतजार करने की जरूरत नहीं है। जिस दिन व्यक्ति यह निर्णय ले लेता है कि उसे अपने स्वास्थ्य और परिवार की चिंता है, उसी दिन से तंबाकू छोड़ने की शुरुआत हो सकती है। तंबाकू छोड़ने के कुछ ही समय बाद शरीर में सकारात्मक बदलाव शुरू हो जाते हैं और भविष्य में गंभीर बीमारियों का खतरा कम होने लगता है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे स्वयं तंबाकू से दूर रहें और अपने परिवार, मित्रों तथा समाज के अन्य लोगों को भी इसके दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करें। एक व्यक्ति का सही निर्णय पूरे परिवार को सुरक्षित और स्वस्थ जीवन दे सकता है। डॉ. तोमर ने कहा कि कैंसर के खिलाफ लड़ाई अस्पतालों में नहीं, बल्कि जागरूकता से शुरू होती है। यदि लोग तंबाकू से दूरी बनाएं, स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराएं, तो कैंसर के अनेक मामलों को रोका जा सकता है। स्वस्थ जीवन का सबसे सरल मंत्र यही है-तंबाकू छोड़ें, जीवन बचाएं।


