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देश के लिए बलिदान देने वाले वीर जवानों का सम्मान केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि राष्ट्र का नैतिक कर्तव्य है:  Beniwal

देश के लिए बलिदान देने वाले वीर जवानों का सम्मान केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि राष्ट्र का नैतिक कर्तव्य है: Beniwal

यपुर। नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने राजस्थान के चूरू जिले की राजगढ़ तहसील में स्थित खेड़ी ग्राम के निवासी जगवीर सिंह को शहीद का दर्जा देने और उनका अंतिम संस्कार पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ किए जाने की मांग की है।

आरएलपी प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने एक्स के माध्यम से कहा कि जगवीर सिंह सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) में एमटी ड्राइवर के पद पर कार्यरत थे, अरूणाचलप्रदेश में ड्यूटी पर कार्यरत रहते समय सेना की ट्रक के बचाव कार्य के दौरान भूस्खलन होने की वजह से शहीद हो गए, लेकिन भारतीय जनता पार्टी के कई नेता दिवगंत सैनिक जगवीर सिंह का अंतिम संस्कार सैन्य सम्मान से नहीं करवाने के पक्ष में है,इससे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण कुछ नहीं हो सकता।

बेनीवाल ने कहा कि कल दिल्ली स्थित मेरे आवास पर शहीद के परिजनों एवं मित्रों ने मुलाकात की व दिवंगत सैनिक के परिवार को सभी सरकारी परिलाभ दिलवाने तथा दिवंगत सैनिक को शहीद का दर्जा देते हुए शहीद का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान / सैन्य सम्मान से करवाने की मांग की।

उन्होंने कहा कि मैंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ कई अधिकारियों से भी बात की मगर बीआरओ के वाहन से दिवंगत सैनिक के पार्थिव देह को केवल राजगढ़ तक लाया गया जबकि आगे गांव के लिए वाहन तक नहीं दिया जा रहा है और न ही सेना की टुकड़ी को गार्ड ऑफ ऑनर देने के लिए अभी तक भेजा गया है।

आरएलपी प्रमुख बेनीवाल ने कहा कि मैं प्रदेश के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से पूछना चाहता हूं कि एक शहीद के प्रति आपकी सरकार और आपके अधिकारियों की संवेदनाएं मर चुकी है क्या? क्या जिला कलक्टर और जिला पुलिस अधीक्षक सहित अन्य अफसरों की कोई जवाबदेही नहीं बनती है कि वो मौके पर जाए? मैं राजस्थान सरकार के सैनिक कल्याण मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ को कहना चाहता हूं कि मौके पर लोग धरने पर बैठे है इसलिए संबंधित से समन्वय स्थापित कर दिवंगत सैनिक को शहीद का दर्जा दिलवाने व शहीद का अंतिम संस्कार पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ करवाने हेतु आवश्यक हस्तक्षेप करें। मैंने पुनः उच्च अधिकारियों से इस संदर्भ में दूरभाष पर वार्ता की है। देश के लिए बलिदान देने वाले वीर जवानों का सम्मान केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि राष्ट्र का नैतिक कर्तव्य है।

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