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Hanuman Beniwal ने सीएम भजनलाल से मांगे इन प्रश्नों के जवाब, बोल दी है ये बड़ी बात

Hanuman Beniwal ने सीएम भजनलाल से मांगे इन प्रश्नों के जवाब, बोल दी है ये बड़ी बात

यपुर। नागौर सांसद और आरएलपी प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने संपर्क पोर्टल को लेकर आज प्रदेश की भजनलाल सरकार को निशाने पर लिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर संपर्क पोर्टल से जुड़ी एक खबर को पोस्ट किया है।

उन्होंने इस संबंध में सीएम भजनलाल शर्मा से तीन प्रश्नों का जवाब मांगा है। हनुमान बेनीवाल ने आज एक्स के माध्यम से कहा कि राजस्थान में “संपर्क पोर्टल”आम जनता की समस्याओं के समाधान का जरिया बनना था, लेकिन हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।

नागौर सहित कई जगहों से लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि बिना समस्या का समाधान किए ही अधिकारियों द्वारा शिकायतों को “निस्तारित” दिखा दिया जाता है। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से हमारे प्रश्न है कि कागजों में समाधान, जमीन पर वही पुरानी समस्या,क्या यही है आपकी सरकार का जवाबदेही मॉडल? क्या आपकी सरकार का “समाधान”सिर्फ आंकड़ों में सुधार तक सीमित रह गया है? अगर जनता की आवाज सिर्फ पोर्टल पर दबाई जा रही है, तो फिर इस व्यवस्था का क्या औचित्य? बेनीवाल ने कही कि अधिकारियों ने सम्पर्क पोर्टल के जो हालात बना रखे है वो न केवल व्यवस्था पर सवाल है, बल्कि जनता के विश्वास को भी कमजोर करता है।

स्वास्थ्य सेवाओं और व्यवस्थाओं को लेकर किए जा रहे बड़े-बड़े दावों का क्या औचित्य?
वहीं एक पोस्ट के माध्यम से कहा कि राजस्थान के सरकारी अस्पतालों की ये तस्वीरें झकझोर करने वाली हैं। कहीं मरीज गर्मी में तड़प रहे हैं, कहीं एक बेड पर तीन-तीन बच्चे, तो कहीं परिजन घर से पंखे लाने को मजबूर हैं। मैं राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से पूछना चाहता हूं कि क्या यही है सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था? मैं प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य मंत्री से भी पूछना चाहता हूं कि क्या आपको अस्पतालों में ऐसी स्थिति की जानकारी है या जानबूझकर आंखें मूंदी हुई हैं? जब अस्पतालों में पानी, पंखे, कूलर और बुनियादी सुविधाएं तक नहीं हैं, तो स्वास्थ्य सेवाओं और व्यवस्थाओं को लेकर किए जा रहे बड़े-बड़े दावों का क्या औचित्य है? नागौर सहित प्रदेश भर के अस्पतालों में यह स्थिति राजस्थान की भाजपा सरकार की संवेदनहीनता का बड़ा उदाहरण है। मुख्यमंत्री जी, राजस्थान की जनता जवाब मांग रही है कि आखिर कब सुधरेगी अस्पतालों की यह बदहाल व्यवस्था ?

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