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भारत के फिनटेक सेक्टर ने 2026 की पहली तिमाही में हासिल की 513 मिलियन डॉलर की फंडिंग, हुई 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी: रिपोर्ट

भारत के फिनटेक सेक्टर ने 2026 की पहली तिमाही में हासिल की 513 मिलियन डॉलर की फंडिंग, हुई 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी: रिपोर्ट

ई दिल्ली, 28 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत के फिनटेक सेक्टर ने 2026 की पहली तिमाही में 513 मिलियन डॉलर की फंडिंग हासिल की, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 2 प्रतिशत ज्यादा है। हालांकि, फंडिंग राउंड्स की संख्या 99 से घटकर 45 रह गई है।

डेटा इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म ट्रैक्सन टेक्नोलॉजीज लिमिटेड की रिपोर्ट के अनुसार, कुल फंडिंग में स्थिरता दिख रही है, लेकिन निवेश का तरीका बदल रहा है और अब पैसा कम लेकिन बड़े सौदों में लगाया जा रहा है।

औसतन निवेश की राशि दोगुनी से ज्यादा हो गई है, क्योंकि निवेशक अब मजबूत और पहले से स्थापित कंपनियों में पैसा लगा रहे हैं। लेट-स्टेज फंडिंग 273 मिलियन डॉलर तक पहुंच गई, जो पिछली तिमाही के 121 मिलियन डॉलर से 126 प्रतिशत ज्यादा है, जबकि शुरुआती स्तर (सीड) की फंडिंग घटकर 25.7 मिलियन डॉलर रह गई है, जो पहले 72.3 मिलियन डॉलर थी।

अर्ली-स्टेज फंडिंग 214 मिलियन डॉलर रही, जो पिछली तिमाही से 47 प्रतिशत कम है, लेकिन पिछले साल की तुलना में 13 प्रतिशत ज्यादा है।

रिपोर्ट में बताया गया कि केवल ऑनलाइन लेंडिंग सेक्टर में ही कुल फंडिंग का लगभग 60 प्रतिशत निवेश हुआ, जिससे पता चलता है कि निवेशक ऐसे बिजनेस मॉडल को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिनकी कमाई और कामकाज पहले से साबित है।

रिपोर्ट के अनुसार, निवेश का पैटर्न ऐसा है जिसमें पैसा शुरुआत और बड़े स्तर की कंपनियों में ज्यादा जा रहा है, जबकि बीच के स्तर पर कम निवेश हो रहा है। खासकर शुरुआती स्टार्टअप्स में फंडिंग तेजी से घट रही है।

इस तिमाही में निवेश से बाहर निकलने (एग्जिट) की गतिविधि भी कम रही। केवल दो कंपनियों का अधिग्रहण हुआ और कोई नई आईपीओ या यूनिकॉर्न सामने नहीं आया।

मुंबई की कंपनियों को इस तिमाही में सबसे ज्यादा 61 प्रतिशत फंडिंग (311 मिलियन डॉलर) मिली, जबकि बेंगलुरु को 30 प्रतिशत हिस्सा मिला।

पिछले साल इसी अवधि में मुंबई का हिस्सा केवल 9 प्रतिशत था, जबकि बेंगलुरु के पास 51 प्रतिशत फंडिंग थी।

रिपोर्ट में कहा गया कि यह बदलाव ऑनलाइन लेंडिंग और सस्ती हाउसिंग से जुड़े फिनटेक सेक्टर के बढ़ने के कारण हुआ है। मुंबई में बैंकों, एनबीएफसी और बीमा कंपनियों की मौजूदगी इस क्षेत्र के लिए एक बड़ा फायदा है।

--आईएएनएस

डीबीपी

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