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बीकानेर में गोचर भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन तेज, महापड़ाव की तैयारी

बीकानेर में गोचर भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन तेज, महापड़ाव की तैयारी

बीकानेर में गोचर भूमि के अधिग्रहण को लेकर विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। शहरवासियों और स्थानीय संगठनों ने बीकानेर विकास प्राधिकरण (बीडीए) की नीतियों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर दी है।

इसी कड़ी में मंगलवार को कचहरी परिसर में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में गोचर ओरण संरक्षण समिति बीकानेर और अखिल भारतीय गोवंश गोचर संरक्षक संस्थान, बीकानेर (राजस्थान) के पदाधिकारी शामिल हुए।

बैठक का मुख्य विषय 27 जनवरी को प्रस्तावित महापड़ाव था। पदाधिकारियों ने इस दौरान गोचर भूमि के अधिग्रहण और बीडीए के नाम म्यूटेशन को लेकर शहरवासियों में बढ़ते आक्रोश पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में निर्णय लिया गया कि महापड़ाव संत समाज की उपस्थिति में जिला कलक्टर कार्यालय के सामने आयोजित किया जाएगा, ताकि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर स्पष्ट संदेश दिया जा सके।

पदाधिकारियों ने कहा कि बीडीए द्वारा गोचर भूमि का म्यूटेशन किए जाने से शहरवासियों में भारी असंतोष है। उनका कहना है कि यह भूमि न केवल पशुपालन के लिए आवश्यक है बल्कि सामाजिक और पारंपरिक दृष्टि से भी इसका महत्व अत्यधिक है। इसीलिए वे अधिग्रहण और म्यूटेशन के खिलाफ दृढ़ता से विरोध कर रहे हैं।

बैठक में यह भी बताया गया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिले के विधायकों ने मौखिक रूप से आंदोलनरत गोभक्तों को सकारात्मक आश्वासन दिया है। हालांकि, समिति का कहना है कि केवल मौखिक आश्वासन पर्याप्त नहीं है। उन्होंने स्पष्ट रूप से प्रशासन से लिखित आश्वासन देने की मांग की है ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की अनिश्चितता और विवाद की संभावना समाप्त हो सके।

सभी पदाधिकारियों ने इस अवसर पर नागरिकों से संयम बनाए रखने और शांतिपूर्ण ढंग से अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने की अपील की। उनका कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य केवल गोचर भूमि की सुरक्षा और संरक्षण है, न कि किसी प्रकार का वैयक्तिक या राजनीतिक संघर्ष।

विशेषज्ञों का कहना है कि बीकानेर में इस प्रकार के आंदोलन स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के लिए गंभीर चुनौती पेश कर सकते हैं। इसलिए प्रशासन को समय रहते जनता के आश्वासनों और मांगों पर ध्यान देना आवश्यक है।

अधिकारियों के अनुसार, 27 जनवरी के महापड़ाव को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। सभी संगठनों ने जनता को शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है, ताकि गोचर भूमि के संरक्षण और शहरवासियों के हित की रक्षा सुनिश्चित की जा सके। इस आंदोलन के परिणाम आगामी निर्णयों और प्रशासन की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेंगे।

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