बलरामपुर के एक विद्यालय में संस्कृत भाषा के प्रति विद्यार्थियों की रुचि बढ़ाने और भारतीय ज्ञान परंपरा से उन्हें जोड़ने के उद्देश्य से संस्कृत दिवस सप्ताह मनाया गया। पूरे सप्ताह स्कूल में विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिससे परिसर में संस्कृत और भारतीय संस्कृति से जुड़ा माहौल देखने को मिला।
कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं ने संस्कृत श्लोकों का लयबद्ध और सस्वर पाठ किया। इसके अलावा पारंपरिक संस्कृत शिक्षण पद्धति से जुड़ी गतिविधियों में भी विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया। आयोजकों का उद्देश्य बच्चों को संस्कृत भाषा के साथ भारतीय संस्कृति, परंपराओं और विरासत की जानकारी से जोड़ना रहा।
संस्कृत को संस्कृति और ज्ञान की भाषा बताया
विद्यालय के प्रबंधक पराग बोस ने कहा कि संस्कृत को केवल संवाद की भाषा के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। यह भारत की संस्कृति, दर्शन और प्राचीन ज्ञान परंपरा से गहराई से जुड़ी हुई भाषा है।
उन्होंने विद्यार्थियों को संस्कृत सीखने के लिए प्रोत्साहित किया और कहा कि आधुनिक शिक्षा हासिल करने के साथ बच्चों का अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव भी जरूरी है। उन्होंने संस्कृत भाषा के संरक्षण और आगे बढ़ाने में स्कूल तथा विद्यार्थियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
श्लोक और साहित्य से मिलते हैं जीवन मूल्य
प्रधानाचार्या सुदीपा बोस ने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि संस्कृत में मौजूद श्लोक, सुभाषित और साहित्य भारतीय ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनमें अनुशासन, नैतिकता, संस्कार और जीवन मूल्यों से जुड़े अनेक संदेश मिलते हैं।
उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति और विरासत से परिचित कराने के साथ उनके आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति क्षमता को विकसित करने में भी मदद करते हैं।
रोजमर्रा के जीवन से संस्कृत को जोड़ने पर जोर
विद्यालय के संस्कृत शिक्षक आचार्य नितिन त्रिपाठी ने कहा कि संस्कृत भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा की महत्वपूर्ण धरोहर है। उनके अनुसार, संस्कृत दिवस सप्ताह जैसे कार्यक्रम तभी अधिक प्रभावी होंगे, जब विद्यार्थी भाषा को सिर्फ किताबों और पाठ्यक्रम तक सीमित न रखें।
उन्होंने विद्यार्थियों को संस्कृत के श्लोकों, सुभाषितों और साहित्य को समझने तथा नियमित रूप से पढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि भाषा को व्यवहार और संस्कारों से जोड़ने पर इसके अध्ययन का उद्देश्य और अधिक सार्थक हो सकता है।
नई पीढ़ी को विरासत से जोड़ने का प्रयास
सप्ताहभर चले कार्यक्रम के जरिए विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति और प्राचीन ज्ञान परंपरा के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराया गया। समापन के दौरान विद्यालय परिवार ने संस्कृत भाषा के संरक्षण और संवर्धन के साथ नई पीढ़ी को भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के प्रयास जारी रखने का संकल्प लिया।

