मतदान खत्म होने के बाद सबसे अहम जिम्मेदारी होती है वोटिंग मशीनों और बैलेट बॉक्स की सुरक्षा की। भारत निर्वाचन आयोग के तय नियमों के अनुसार इन्हें विशेष "स्ट्रांग रूम" में बेहद सख्त निगरानी में रखा जाता है, जहां किसी भी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश लगभग खत्म कर दी जाती है।
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बूथ से स्ट्रांग रूम तक सख्त प्रक्रिया
मतदान के बाद EVM और बैलेट बॉक्स को पोलिंग बूथ से स्ट्रांग रूम तक प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी में लाया जाता है। इस दौरान राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहते हैं, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे। स्ट्रांग रूम को भी इन्हीं की मौजूदगी में सील किया जाता है।
तीन स्तर की सुरक्षा व्यवस्था
स्ट्रांग रूम की सुरक्षा को तीन घेरों में बांटा जाता है:
- सबसे अंदर केंद्रीय अर्धसैनिक बल (CAPF) तैनात रहते हैं।
- उसके बाहर राज्य सशस्त्र पुलिस की सुरक्षा रहती है।
- बाहरी क्षेत्र में स्थानीय पुलिस और प्रशासन की निगरानी होती है।
डबल लॉक और सीलिंग सिस्टम
स्ट्रांग रूम में केवल एक ही प्रवेश द्वार होता है, जिस पर दो ताले लगाए जाते हैं। एक चाबी रिटर्निंग ऑफिसर (RO) और दूसरी सहायक रिटर्निंग ऑफिसर (ARO) के पास रहती है। कमरे को उम्मीदवारों और उनके एजेंटों की मौजूदगी में सील किया जाता है, और वे अपनी सील भी लगा सकते हैं।
24 घंटे CCTV निगरानी
स्ट्रांग रूम के बाहर और अंदर जाने वाले रास्तों पर 24×7 CCTV कैमरे लगे होते हैं। इनकी लाइव निगरानी उम्मीदवारों या उनके प्रतिनिधियों को भी देखने की अनुमति होती है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है।
लॉग बुक और एंट्री कंट्रोल
सुरक्षा कर्मी हर आने-जाने वाले व्यक्ति का रिकॉर्ड लॉग बुक में दर्ज करते हैं। बिना अनुमति किसी को भी अंदर प्रवेश नहीं दिया जाता। परिसर में अनधिकृत वाहनों की एंट्री भी पूरी तरह प्रतिबंधित रहती है।
खिड़कियां सील, सख्त निगरानी
स्ट्रांग रूम आमतौर पर सुरक्षित सरकारी इमारतों में बनाए जाते हैं। वहां की खिड़कियां और अन्य रास्तों को पूरी तरह सील कर दिया जाता है, ताकि किसी भी तरह की छेड़छाड़ की संभावना खत्म हो सके।
उम्मीदवारों की निगरानी भी शामिल
राजनीतिक दलों को स्ट्रांग रूम के बाहर अपने एजेंट तैनात करने की अनुमति होती है, जो 24 घंटे सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखते हैं।
हाल ही में तृणमूल कांग्रेस के नेताओं द्वारा EVM और बैलेट बॉक्स से छेड़छाड़ के आरोप लगाए गए थे, हालांकि चुनाव अधिकारियों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पूरी व्यवस्था कड़े नियमों और निगरानी में संचालित होती है और किसी भी गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं है।

