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Japan के पास विशाल प्लूटोनियम भंडार, वैश्विक परमाणु शक्ति बनने की संभावनाओं पर चर्चा तेज

Japan के पास विशाल प्लूटोनियम भंडार, वैश्विक परमाणु शक्ति बनने की संभावनाओं पर चर्चा तेज

Iran की परमाणु साइट्स को लेकर बढ़ते तनाव के बीच एशिया में परमाणु शक्ति संतुलन को लेकर नई बहस छिड़ गई है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि Japan के पास इतना प्लूटोनियम मौजूद है कि वह बहुत कम समय में बड़ी परमाणु शक्ति बनने की क्षमता रखता है।

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यह दावा PLA Daily की एक रिपोर्ट में किया गया, जिसमें जापान की रक्षा क्षमताओं और परमाणु संसाधनों पर सवाल उठाए गए। रिपोर्ट के अनुसार, जापान के पास लगभग 44.4 टन प्लूटोनियम का भंडार है, जिससे सैद्धांतिक रूप से हजारों परमाणु हथियार तैयार किए जा सकते हैं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि यह आंकड़ा संभावित रूप से United States और Russia जैसी बड़ी परमाणु शक्तियों के मौजूदा हथियार भंडार के बराबर या उससे अधिक क्षमता दर्शाता है। हालांकि, यह केवल तकनीकी क्षमता का आकलन है, वास्तविक हथियारों की संख्या नहीं।

जापान के प्लूटोनियम भंडार का एक हिस्सा देश के भीतर है, जबकि शेष United Kingdom और France जैसे देशों में सुरक्षित रखा गया है। यह सामग्री मुख्यतः परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम से जुड़े पुनःप्रसंस्करण (reprocessing) के दौरान प्राप्त होती है।

इतिहास की बात करें तो जापान ने 1967 में "तीन परमाणु-विरोधी सिद्धांत" अपनाए थे, जिनके तहत देश ने न तो परमाणु हथियार रखने, न बनाने और न ही अपने क्षेत्र में उनकी अनुमति देने की नीति तय की थी। यह नीति बाद में संसद द्वारा भी स्वीकृत की गई।

हालांकि, रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि जापान अपनी रक्षा क्षमताओं और तकनीकी ढांचे को तेजी से मजबूत कर रहा है। इसमें अनुसंधान कार्यक्रमों और रक्षा बजट में बढ़ोतरी को भी रेखांकित किया गया है, जिसे कुछ विश्लेषक भविष्य की संभावनाओं से जोड़कर देख रहे हैं।

ध्यान देने वाली बात यह है कि Japan और Iran दोनों ही Nuclear Non-Proliferation Treaty (NPT) के सदस्य हैं। यह संधि परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने और शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाई गई थी। इसके तहत सीमित देशों को ही परमाणु हथियार रखने की अनुमति है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जापान की मौजूदा स्थिति "न्यूक्लियर लेटेंट कैपेबिलिटी" (अर्थात जरूरत पड़ने पर तेजी से परमाणु हथियार बनाने की क्षमता) को दर्शाती है, लेकिन फिलहाल वह अपने घोषित शांतिपूर्ण परमाणु सिद्धांतों के दायरे में ही कार्य कर रहा है।

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