बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री हेमा मालिनी ने अपने फिल्मी करियर के दौरान मिलने वाली फीस को लेकर लंबे समय से चली आ रही चर्चाओं पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें कभी भी अपने दौर की सबसे ज्यादा फीस पाने वाली अभिनेत्री कहना सही नहीं है और उन्होंने हमेशा काम को पैसों से अधिक महत्व दिया।
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एक बातचीत के दौरान हेमा मालिनी ने कहा कि उस समय फिल्म इंडस्ट्री में कलाकारों की फीस आज की तुलना में काफी कम होती थी। उन्होंने बताया कि निर्माता और निर्देशक उनके काम को पसंद करते थे, इसलिए समय के साथ उनकी फीस में कुछ बढ़ोतरी जरूर हुई, लेकिन उन्हें कभी भी आज के सितारों जैसी बड़ी रकम नहीं मिली।
उन्होंने कहा कि उस दौर में फिल्मों में काम करने का उद्देश्य केवल अधिक कमाई करना नहीं था। कलाकारों को अपने काम से मिलने वाला सम्मान, दर्शकों का प्यार और फिल्म की सफलता अधिक मायने रखती थी। यही वजह थी कि उन्होंने कभी भी किसी फिल्म के लिए ज्यादा फीस की मांग नहीं की।
हेमा मालिनी ने यह भी बताया कि उनके करियर से जुड़े आर्थिक फैसले उनकी मां संभालती थीं। यदि किसी निर्माता की आर्थिक स्थिति कमजोर होती और वह अधिक भुगतान करने में सक्षम नहीं होता, तो उनकी मां बिना किसी विवाद के उपलब्ध राशि स्वीकार कर लेती थीं। उनके परिवार ने हमेशा निर्माताओं की परिस्थितियों को समझते हुए सहयोगात्मक रवैया अपनाया।
उन्होंने एक पुराना अनुभव साझा करते हुए बताया कि फिल्म 'मीरा' के निर्माण के दौरान निर्माता के पास सीमित बजट था। ऐसे में जितनी राशि उन्हें दी जाती थी, वे उसे बिना किसी शिकायत के स्वीकार कर लेती थीं। उनके अनुसार, उस समय फिल्मों में काम करने का सबसे बड़ा उद्देश्य अच्छी कहानियों का हिस्सा बनना और दर्शकों का स्नेह पाना था, न कि केवल अधिक फीस हासिल करना।
हेमा मालिनी का यह बयान उस दौर की फिल्म इंडस्ट्री की कार्यशैली और कलाकारों के नजरिए को भी दर्शाता है, जहां पेशेवर रिश्तों और आपसी विश्वास को आर्थिक पहलुओं से अधिक महत्व दिया जाता था।

