मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर बहु-एजेंसी, वैज्ञानिक और समयबद्ध जांच की मांग; कहा- किसी भी स्तर पर संरक्षण दिए जाने की आशंका न रहे
लखनऊ, (समर सलिल)। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री अजय राय ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर श्री राम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं की स्वतंत्र, वैज्ञानिक एवं बहु-एजेंसी फोरेंसिक जांच कराने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर किसी को संरक्षण दिए जाने की आशंका उत्पन्न नहीं होने दी जानी चाहिए।
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अजय राय ने अपने पत्र में कहा कि अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में मंदिर से जुड़े प्रत्येक आर्थिक लेन-देन में पूर्ण पारदर्शिता, जवाबदेही और सार्वजनिक विश्वास बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने उल्लेख किया कि हाल में चढ़ावे की नकदी और श्रद्धालुओं द्वारा दान की गई बहुमूल्य वस्तुओं से संबंधित कथित अनियमितताओं के मामले में एसआईटी जांच के बाद एफआईआर दर्ज हुई और कुछ कर्मचारियों की गिरफ्तारी भी हुई है।
उन्होंने पत्र में यह भी कहा कि जांच के दौरान सीसीटीवी रिकॉर्डिंग की सीमित उपलब्धता और पुराने रिकॉर्ड उपलब्ध न होने से कई सवाल खड़े हुए हैं। यदि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का समयबद्ध और विधिसम्मत संरक्षण नहीं किया गया, तो यह स्वयं एक गंभीर विषय है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने वर्ष 2021 में मंदिर और आसपास की भूमि खरीद, निर्माण कार्यों तथा कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े आरोपों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि इन सभी मामलों की समग्र और स्वतंत्र जांच आवश्यक है। उनका कहना है कि आरोपों की सच्चाई केवल वैज्ञानिक वित्तीय एवं फोरेंसिक जांच से ही सामने आ सकती है।
अजय राय ने मांग की कि मंदिर की स्थापना से अब तक प्राप्त समस्त नकद चढ़ावे, डिजिटल दान, स्वर्ण, रजत और अन्य बहुमूल्य दान का स्वतंत्र ऑडिट एवं भौतिक सत्यापन कराया जाए। साथ ही दान से बैंक जमा तक पूरे धन प्रवाह (मनी ट्रेल), बैंक खातों, लेखा-पुस्तकों, ऑडिट रिपोर्ट, स्टॉक रजिस्टर, डिजिटल अभिलेख, निविदाओं, अनुबंधों, उप-ठेकों, सामग्री खरीद, भूमि क्रय-विक्रय तथा निर्माण कार्यों का फोरेंसिक विश्लेषण कराया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच में अपराध से अर्जित धन या मनी लॉन्ड्रिंग के संकेत मिलते हैं तो संबंधित एजेंसियां कानून के अनुसार तत्काल कार्रवाई करें।
पत्र में उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि कथित अनियमितताएं लंबे समय तक चलती रहीं, तो आंतरिक नियंत्रण, लेखा-परीक्षण और प्रशासनिक निगरानी में इतनी बड़ी विफलता कैसे हुई तथा जिम्मेदार अधिकारियों ने सरकार को समय पर जानकारी क्यों नहीं दी।
अजय राय ने कहा कि यह मामला किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, सार्वजनिक धन की पवित्रता और शासन की विश्वसनीयता से जुड़ा है। इसलिए जांच पूरी तरह निष्पक्ष, स्वतंत्र, वैज्ञानिक और समयबद्ध तरीके से कराई जानी चाहिए तथा उसकी प्रगति और निष्कर्षों को यथासंभव सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
उन्होंने पत्र के अंत में कहा कि यदि उपलब्ध तथ्यों और संकेतों के बावजूद व्यापक एवं स्वतंत्र जांच नहीं कराई जाती है, तो जनता में यह संदेश जाएगा कि प्रभावशाली लोगों की निष्पक्ष जांच नहीं होने दी जा रही है। ऐसी स्थिति में करोड़ों श्रद्धालुओं का विश्वास प्रभावित होगा। इसलिए कानून के समक्ष सभी समान हैं और किसी भी स्तर पर किसी को संरक्षण दिए जाने की आशंका उत्पन्न नहीं होने दी जानी चाहिए।
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