- AKTU के वास्तुकला एवं योजना संकाय में दो दिवसीय कला कार्यशाला ने नवप्रवेशी विद्यार्थियों को सृजन के विविध माध्यमों से कराया परिचित
लखनऊ,(समर सलिल)। डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (AKTU), लखनऊ के वास्तुकला एवं योजना संकाय (FOAP) में आयोजित दो दिवसीय 'नवागमन' ओरिएंटेशन कार्यक्रम का समापन रंगमय, प्रेरणादायी और सृजनात्मक कला कार्यशाला के साथ हुआ।
कार्यक्रम में प्रथम वर्ष के सभी नवप्रवेशी विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और चित्रकला के विविध माध्यमों के जरिए अपनी कल्पनाशीलता एवं रचनात्मक अभिव्यक्ति को नया आयाम दिया।
कला कार्यशाला ने विद्यार्थियों में सृजनात्मक सोच, सौंदर्यबोध और आत्मविश्वास विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रंगों, रेखाओं और आकृतियों के साथ विद्यार्थियों के स्वतंत्र प्रयोगों से कैनवास पर अनेक आकर्षक कलाकृतियां उभरकर सामने आईं। प्रत्येक रचना विद्यार्थियों की नई शुरुआत, नए सपनों और रचनात्मक भविष्य की जीवंत अभिव्यक्ति बनी।
कार्यक्रम के संयोजक भूपेंद्र कुमार अस्थाना ने बताया कि 'नवागमन' का उद्देश्य विद्यार्थियों को वास्तुकला और दृश्य कला के गहरे संबंधों से परिचित कराना था, ताकि वे कला को केवल एक माध्यम के रूप में नहीं, बल्कि सोच, संवेदना और सृजन की विस्तृत भाषा के रूप में समझ सकें।
दो दिवसीय कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों ने कैनवास हैंड बैग पेंटिंग, वर्ली पेंटिंग ऑन कैनवास और जलरंग चित्रण जैसी कला विधाओं में सक्रिय भागीदारी की। कोलकाता से आए प्रसिद्ध चित्रकार सौरभ शी ने जलरंग माध्यम का विशेष प्रदर्शन प्रस्तुत किया। उन्होंने विद्यार्थियों को रंगों की पारदर्शिता, टेक्सचर, प्रकाश-छाया और ब्रश तकनीकों की बारीकियों से परिचित कराया। उनके मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने जलरंग के व्यावहारिक प्रयोग सीखे और अपनी रचनात्मक कृतियां तैयार कीं।
पूरे कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने रंग, आकार, रेखा और संरचना के साथ स्वतंत्र प्रयोग करते हुए अपनी कल्पनाओं को कलाकृतियों के रूप में साकार किया। कला कार्यशाला का संयोजन भूपेंद्र कुमार अस्थाना ने किया। कार्यक्रम के समन्वयक आर्किटेक्ट ताबिश अहमद अब्दुल्ला रहे, जबकि कलाकार धीरज यादव और रत्नप्रिया ने सहयोगी विशेषज्ञ एवं आर्ट कोऑर्डिनेटर के रूप में विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। समापन दिवस पर आयोजित परिचय एवं संवाद सत्र में संकाय की अधिष्ठाता डॉ. वंदना सहगल सहित सभी प्राध्यापक उपस्थित रहे। उन्होंने नवप्रवेशी विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए उन्हें विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, रचनात्मक और व्यावसायिक गतिविधियों से परिचित कराया।
अधिष्ठाता डॉ. वंदना सहगल ने विद्यार्थियों द्वारा निर्मित कलाकृतियों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, सौंदर्यबोध और सृजनात्मक क्षमता के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि वास्तुकला की शिक्षा केवल भवनों के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संवेदनशील दृष्टि, कल्पनाशील सोच और रचनात्मक अभिव्यक्ति विकसित करने की सतत प्रक्रिया है। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि 'नवागमन' उनके लिए सीखने, प्रयोग करने और कला के माध्यम से स्वयं को अभिव्यक्त करने का यादगार, प्रेरणादायी और उत्साहवर्धक अनुभव रहा।

