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सलमान खान की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट की टिप्पणी, पूछा- क्या ब्रेसलेट और घड़ी पर भी हो सकता है पर्सनैलिटी राइट्स का दावा?

सलमान खान की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट की टिप्पणी, पूछा- क्या ब्रेसलेट और घड़ी पर भी हो सकता है पर्सनैलिटी राइट्स का दावा?

फिल्म 'काला हिरण - द बैटल फॉर लीगेसी' को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने पर्सनैलिटी राइट्स (व्यक्तित्व अधिकार) की सीमा को लेकर अहम सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि केवल किसी अभिनेता की तरह ब्रेसलेट, घड़ी, बालियां या अन्य एक्सेसरी पहन लेने से यह नहीं माना जा सकता कि वह उसी व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल है।

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अदालत ने उठाए अहम सवाल

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पूछा कि यदि कोई व्यक्ति किसी मशहूर अभिनेता की तरह ब्रेसलेट, पगड़ी या घड़ी पहनता है, तो क्या उस पर भी किसी एक व्यक्ति का विशेष अधिकार माना जा सकता है। अदालत ने यह भी जानना चाहा कि पर्सनैलिटी राइट्स का दायरा आखिर कहां तक माना जाना चाहिए।

सलमान खान की ओर से क्या कहा गया?

याचिका में दावा किया गया कि फिल्म के निर्माता अभिनेता की छवि और पहचान से मिलते-जुलते तत्वों का उपयोग कर व्यावसायिक लाभ उठाना चाहते हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि फिल्म की कहानी 1998 के चर्चित काला हिरण शिकार प्रकरण और उससे जुड़े विवादों से प्रेरित प्रतीत होती है। इसी आधार पर फिल्म और उसके टीजर की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की गई।

कोर्ट ने कहा- केवल समानता पर्याप्त नहीं

अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी किरदार के पहनावे, ब्रेसलेट या अन्य चीजों में समानता दिखना यह साबित नहीं करता कि फिल्म सीधे किसी विशेष व्यक्ति पर आधारित है। कोर्ट के अनुसार, ऐसे मामलों में स्पष्ट और ठोस संबंध दिखाना आवश्यक है। केवल अनुमान या संकेतों के आधार पर फिल्म की रिलीज पर रोक नहीं लगाई जा सकती।

एक्सेसरीज को लेकर अदालत की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान जब अभिनेता की ओर से बालियां, ब्रेसलेट और अन्य एक्सेसरीज का भी उल्लेख किया गया तो कोर्ट ने टिप्पणी की कि क्या अब इन वस्तुओं को पहनने पर भी किसी व्यक्ति का विशेष अधिकार माना जाएगा। अदालत ने कहा कि ऐसा आदेश देना न्यायिक दृष्टि से उचित नहीं होगा और पूछा कि क्या इस तरह का कोई कानूनी उदाहरण मौजूद है।

नई दलीलों पर कोर्ट का रुख

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कुछ अतिरिक्त इंटरव्यू और सोशल मीडिया पोस्ट का हवाला देने की कोशिश की गई। इस पर अदालत ने कहा कि वह केवल रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेजों और आवेदन में शामिल सामग्री पर ही विचार करेगी। बाद में नई सामग्री जोड़कर दलीलों का दायरा नहीं बढ़ाया जा सकता।

अगली सुनवाई में क्या होगा?

दिल्ली हाई कोर्ट ने फिल्म निर्माताओं को निर्देश दिया है कि याचिका में जिन वीडियो का उल्लेख किया गया है, उनकी प्रतियां याचिकाकर्ता के वकील को उपलब्ध कराई जाएं ताकि उनकी जांच की जा सके। मामले की अगली सुनवाई में फिल्म की रिलीज और टीजर पर रोक लगाने की मांग पर आगे बहस होगी।

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Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Samar Saleel