लखनऊ,(समर सलिल)। उत्तर प्रदेश विधानसभा के मॉनसून सत्र में हुए हंगामे के बाद विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना भावुक हो गए। सदन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वह आत्मावलोकन करेंगे कि क्या वह इस पद के योग्य हैं।
उनके इस बयान ने सदन का माहौल कुछ समय के लिए गंभीर बना दिया। सत्र के दूसरे दिन हुए हंगामे का जिक्र करते हुए सतीश महाना ने कहा कि उन्हें इस बात पर विचार करना पड़ेगा कि वह विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी के योग्य हैं या नहीं। उन्होंने कहा कि बीते साढ़े चार वर्षों में अध्यक्ष के रूप में जो भी जिम्मेदारी निभाई, अब उसका भी मूल्यांकन करने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि उनकी राजनीतिक पारी अब अंतिम चरण में है और उनकी हमेशा कोशिश रही कि विधानसभा ने उन्हें जो सम्मान दिया, उसका ऋण अध्यक्ष के रूप में ईमानदारी से चुका सकें।
दलगत राजनीति से ऊपर उठने की अपील
स्पीकर महाना ने सभी विधायकों से आग्रह किया कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर विधानसभा की गरिमा बनाए रखने के लिए मिलकर काम करें। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन सदन की मर्यादा और भाषा की गरिमा हर परिस्थिति में बनी रहनी चाहिए।
पुराने घटनाक्रम का भी किया जिक्र
अपने संबोधन के दौरान सतीश महाना ने विधानसभा की पुरानी घटनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने याद दिलाया कि जब अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे, तब सदन में दो विधायकों ने विरोध के दौरान अपनी शर्ट उतार दी थी। उस समय भी उन्होंने कहा था कि यह केवल दो विधायकों का नहीं, बल्कि पूरे सदन की गरिमा का सवाल है। उन्होंने यह भी बताया कि जब तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, तब भी उन्होंने उसका विरोध किया था।
'भाषा की मर्यादा बनी रहनी चाहिए'
स्पीकर ने कहा कि विधायक शपथ लेते समय सदन और उसके नेतृत्व के सम्मान का संकल्प लेते हैं। लोकतंत्र में बहस, सहमति और असहमति आवश्यक हैं, लेकिन अभद्र भाषा और व्यक्तिगत टिप्पणियां स्वीकार नहीं की जा सकतीं। उन्होंने कहा कि पिछले दिन सदन में जो कुछ हुआ, उससे वह बेहद दुखी और निराश हैं। उन्होंने बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर के कथन का उल्लेख करते हुए कहा कि कमी संविधान में नहीं, बल्कि उसे चलाने वाले व्यक्तियों में हो सकती है।
सपा विधायक के आचरण पर जताई नाराजगी
बिना नाम लिए सतीश महाना ने जसराना से समाजवादी पार्टी के एक विधायक के व्यवहार पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जिस सदस्य को वह सदन का रोल मॉडल मानते थे, उनके आचरण और सदन के बाहर इस्तेमाल की गई भाषा ने उन्हें सबसे ज्यादा निराश किया। विधानसभा अध्यक्ष का इस तरह सार्वजनिक रूप से भावुक होना बेहद दुर्लभ माना जाता है। उनका बयान सदन की कार्यवाही, राजनीतिक संवाद की मर्यादा और लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को लेकर गंभीर चिंता को दर्शाता है।

