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नई दिल्ली - जब विश्व का ध्यान अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे तनाव पर केंद्रित है, तब भारत चुपचाप अपनी शक्ति बढा रहा है ।
भारत ने ६ अप्रैल को ऐसी परमाणु तकनीक क्षमता हासिल की है, जो विश्व के बहुत कम देशों के पास है । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी ने यह जानकारी देशवासियों को दी ।
भारत का पहला स्वदेशी 'प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर' तमिलनाडु के कल्पक्कम में सफलतापूर्वक चालू हो गया है । उन्होंने कहा कि यह भारत की परमाणु ऊर्जा यात्रा में एक महत्त्पूर्ण और ऐतिहासिक मील का पत्थर है । इस परियोजना में २०० से अधिक भारतीय संस्थानों का योगदान है, जिसमें लघु उद्योगों की भी बडी भागीदारी रही है । प्रधानमंत्री मोदीजी ने 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए कहा कि इस स्वदेशी रिएक्टर का चालू होना भारतीय वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की प्रतिभा का प्रमाण है । यह देश के थोरियम भंडार के उपयोग की दिशा में एक निर्णायक कदम है । यह पूरे देश के लिए गर्व का क्षण है ।
ईंधन जलते-जलते नया ईंधन तैयार करना - रिएक्टर की विशेषता सामान्य परमाणु रिएक्टर में ईंधन जलकर ऊर्जा उत्पन्न करता है और समाप्त हो जाता है; परंतु यह फास्ट ब्रीडर रिएक्टर अलग है । यह ईंधन का उपयोग करते हुए नया ईंधन भी तैयार करता है, इसलिए इसे 'ब्रीडर' कहा जाता है । जब यह रिएक्टर पूरी क्षमता से काम करेगा, तब भारत रूस के पश्चात व्यावसायिक स्तर पर फास्ट ब्रीडर रिएक्टर चलानेवाला दूसरा देश बन जाएगा । भारत के अलावा चीन के पास भी ऐसा रिएक्टर है, परंतु वह अभी व्यावसायिक स्तर पर नहीं है । इस रिएक्टर में उन्नत सुरक्षा प्रणाली है और आपात स्थिति में यह स्वयं सुरक्षित रूप से बंद हो सकता है । |

परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के अगले चरण का शुभारंभ !
वैज्ञानिकों के अनुसार, यह उपलब्धि भारत के तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के दूसरे चरण का आरंभ है । अगले चरण में भारत अपने विशाल थोरियम भंडार का उपयोग करके सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा उत्पन्न कर सकता है । इससे देश की बडी आबादी की बिजली आवश्यकताएं पूरी होंगी और कोयले से होनेवाले प्रदूषण में भी कमी आएगी ।
भारत की परमाणु ऊर्जा सफलता से पाकिस्तान चिंतित !
भारत की इस उपलब्धि के उपरांत पडोसी पाकिस्तान ने इस पर आपत्ति जताई है । पाकिस्तान के शस्त्र नियंत्रण परामर्शदाता और 'स्ट्रैटेजिक प्लान्स डिवीजन' के सदस्य जहीर काजमी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर पाकिस्तान को 'सतर्क' रहने की चेतावनी दी है । उन्होंने आरोप लगाया कि यह 'ब्रीडर' प्रकार का रिएक्टर होने के कारण बिजली उत्पादन के साथ-साथ प्लूटोनियम (जो परमाणु बम बनाने के लिए आवश्यक होता है) भी उत्पन्न कर सकता है । इसलिए भारत इस तकनीक का उपयोग परमाणु हथियार बनाने के लिए कर सकता है । उन्होंने यह भी कहा कि इस रिएक्टर पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी का नियंत्रण नहीं है, जिससे भारत बिना किसी प्रतिबंध के उच्च गुणवत्तावाला प्लूटोनियम बना सकता है । भारत सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुडे सूत्रों को किसी अंतरराष्ट्रीय संस्था के नियंत्रण में नहीं रखा जा सकता । इसलिए यह परियोजना देश की दीर्घकालीन ऊर्जा और रणनीतिक आवश्यकताओं का भाग है ।

