Dailyhunt Logo
  • Light mode
    Follow system
    Dark mode
    • Play Story
    • App Story
साधकों को स्वभावदोष एवं अहं के निर्मूलन की प्रक्रिया सिखाकर स्वसूचनाओं के द्वारा स्वभावदोषों पर विजय प्राप्त करने का मार्गदर्शन करनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी !

साधकों को स्वभावदोष एवं अहं के निर्मूलन की प्रक्रिया सिखाकर स्वसूचनाओं के द्वारा स्वभावदोषों पर विजय प्राप्त करने का मार्गदर्शन करनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी !

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी

१. बचपन के कुछ प्रसंगों का परिणाम मन पर होने से मन में असुरक्षा की सुप्त भावना होना तथा साधना में आने पर सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी द्वारा आधार देकर सदैव ही विशेष ध्यान दिया जाना

'प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में अच्छे-बुरे प्रसंग तो आते ही रहते हैं । उसके अनुसार मेरे जीवन में भी कभी-कभी संघर्ष के प्रसंग आए । मेरे मन पर बचपन में घटित कुछ प्रसंगों का परिणाम हुआ था, इसलिए मेरे मन में असुरक्षा की सुप्त भावना थी । सनातन संस्था के मार्गदर्शन में साधना आरंभ करने पर प्रत्येक प्रसंग में प.पू. डॉक्टरजी ने (सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी ने) मुझे सदैव आधार देकर उन प्रसंगों से मुझे संवारा । उन्होंने सदैव ही मुझ पर ध्यान दिया तथा आज भी वे ही मुझे संभाल रहे हैं ।

 श्री. योगेश जलतारे

२. मन में असुरक्षा की भावना उत्पन्न होने पर मन को स्वसूचना के द्वारा समझाने से मन स्थिर एवं निश्चिंत होना

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी ने साधकों को स्वभावदोष एवं अहं निर्मूलन की प्रक्रिया (स्वयं में स्थित स्वभावदोष एवं अहं अल्प करने के लिए नियमित रूप से चूकें लिखकर उन पर मन को स्वसूचनाएं देना) अपनाने के लिए कहा है । जब मेरे मन में असुरक्षा के विचार आते हैं, तब मैं 'अब तक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी ने ही मुझे प्रत्येक प्रसंग में संभाला है तथा भविष्य में भी वे ही मुझे संभालनेवाले हैं', इस श्रद्धा से मैं स्थिर एवं शांत रहूंगा', यह स्वसूचना देता हूं । मन को 'सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी हैं; इसलिए तुम चिंता मत करो', यह स्वसूचना देकर मन को समझाने से मन स्थिर एवं निश्चिंत होता है ।

३. कष्टकारक सपने आना तथा स्वसूचना लेने से हुआ लाभ

३ अ. रात में बुरे सपने आना अथवा अनिष्ट शक्तियों का स्पर्श प्रतीत होना तथा उसके दूसरे दिन विभिन्न कष्ट होना : 'पिछले एक वर्ष में मैंने यह स्वसूचना निरंतर नहीं ली, तब भी मुझे इस स्वसूचना का एक भिन्न ही अनुभव हुआ । रात को नींद में बीच-बीच में मुझे बुरे सपने आते थे अथवा 'अनिष्ट शक्तियों का स्पर्श हो रहा है', ऐसा मुझे प्रतीत होता था । रात को मेरी प्राणशक्ति घट जाती थी । इससे दूसरे दिन मुझे बहुत थकान होकर अस्वस्थ प्रतीत होता था । मेरी सांस फूलने लगती थी अथवा सिर में वेदना होती थी ।

३ आ. पिछले महिने में बुरा सपना आना; परंतु स्वभावदोष के लिए ली गई स्वसूचना के कारण अंतर्मन को असुरक्षा का भान होते ही वह सतर्क हो जाना तथा सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी को पुकारने से कष्ट से रक्षा होना : पिछले महिने भी २ बार मुझे बुरे सपने आए; परंतु इन सपनों का अंत सुखद था । मुझे सपने में 'मैं प.पू. डॉक्टरजी को पुकार रहा हूं', ऐसा मुझे प्रतीत होता था अथवा सपने में मुझे प.पू. डॉक्टरजी के दर्शन होते थे । मुझे ऐसा ध्यान में आया कि सपने में ही मेरे अंतर्मन को असुरक्षा प्रतीत होती है तथा उससे मेरा मन सतर्क होकर प.पू. डॉक्टरजी को पुकारने लगता है, जिससे कष्ट से मेरी रक्षा होती है ।

'इस अनुभूति से स्वसूचनाएं लेने का महत्त्व मेरे ध्यान में आया तथा वह शास्त्र सिखानेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी की महानता मेरे ध्यान में आई ।'

- श्री. योगेश जलतारे, समूह संपादक, 'सनातन प्रभात' प्रसारमाध्यम (८.४.२०२६)

सनातन का ग्रंथ : 'स्वसूचनाओं द्वारा स्वभावदोष-निर्मूलन'

सनातन के ग्रंथ 'ऑनलाइन' खरीदने हेतु : SanatanShop.com

संपर्क :(0832) 2312664

Dailyhunt
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Sanatan Prabhat Hindi